• July 11, 2020

चालक-परिचालक बाेले-कर्ज लेकर घर चला रहे, बस ऑपरेटर 50 प्रतिशत सवारी पर बसें चलाने काे राजी नहीं

लाॅकडाउन के बाद पहला त्याेहार रक्षाबंधन है। अनलॉक के बाद भी बसाें का नहीं चलना बहनाें के लिए परेशानी भरा हाे सकता है। ट्रेनें नहीं चलने से पब्लिक ट्रांसपाेर्ट बसाें पर ही लोग निर्भर हैं। रक्षाबंधन से पहले बसें नहीं चली ताे बहनाें के लिए यह त्याेहार महंगा पड़ेगा। टैक्सी किराया 2 से 6 हजार रुपए के बीच है। इधर बस अाॅपरेटर कह रहे हैं कि सरकार उनकी शर्तें मानें तभी बसें चलेंगी। प्रशासन इसे शासन स्तर का मामला बता रहा है।
इधर अनलाॅक के बाद भी नहीं खुला रेलवे बुकिंग अाॅफिस, रिजर्वेशन नहीं हाे पा रहे : कलेक्टाेरेट परिसर में स्थित रेलवे बुकिंग अाॅफिस अनलाॅक हाेने के बाद भी नहीं खुला है। रेल पीआरआई मुकेश पांडे ने बताया इंदाैर से ट्रेनें नहीं चल रही हैं, लेकिन रतलाम हाेकर 24 एक्सप्रेस ट्रेनें गुजर रही हैं। यूपी, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, तिरुवंतपुरम, गुजरात, महाराष्ट्र, केरल, पश्चिम बंगाल के लिए ट्रेनें जा रही हैं। राखी पर कई महिलाएं एेसी भी हैं जिन्हें दूसरे प्रदेशाें मंे जाना हाेगा। रेलवे रिजर्वेशन कार्यालय बंद हाेने से लाेगाें काे टिकट बुकिंग कराने में परेशानी हाे रही है।

एलआईजी काॅलाेनी में रहने वाली ललिता भंवर के भाई प्रवीण भंवर का 27 मार्च काे निधन हाे गया था। ललिता का मायका हरदा में है। करीब सवा महीने के बाद ललिता काे डेली छुड़ाने की रस्म अदा कराने मायके ले जाना था। एेसे में 28 जून काे मायके वाले ललिता काे टैक्सी से लेने और छाेड़ने आए। 3 अगस्त काे भाई की पहली राखी है। उसमें भी ललिता काे शामिल हाेना जरूरी है। तब तक बसें नहीं चली ताे टैक्सी का खर्च भुगतना पड़ेगा।

रतलाम जाने का खर्च तीन हजार रु., मायके जाने काे लेकर असमंजस

शिव विहार एक्सटेंशन निवासी दीपिका साधु का मायका रतलाम में है। लाॅकडाउन से दीपिका वैसे ही अपने मायके नहीं जा पाई। अब राखी पर भी मायके जाने काे लेकर असमंजस है। क्याेंकि टैक्सी किराया ही तीन हजार रुपए लग रहा है। दीपिका ने बताया राखी से पहले बस सेवा शुरू हो जाए तो अच्छा वर्ना टैक्सी करके ही जाना पड़ेगा।

टैक्सी किराया अधिकतम 6 हजार, न्यूनतम 2 हजार, टाेल टैक्स अलग
टूर एंड ट्रेवर्ल्स संचालकाें के अनुसार धार से इंदाैर का टैक्सी किराया 2 हजार, उज्जैन का 3500, रतलाम का 2800, खंडवा का 6 हजार है। यह डीजल अाैर ड्राइवरी का है, टाेल टैक्स अलग है। माे. युसूफ, हनीफ खान, साेनू खान, गाेलू खान, अकील माेहम्मद अादि ने बताया बसें बंद हाेने से अार्थिक संकट खड़ा हाे गया है। स्थिति यह है कि कर्ज लेकर राशन लाना पड़ रहा है। साबीर खान, रफीक, माेेहन राव, सलीम ने कहा-ज्यादातर चालक-परिचालक किराए के मकान में रहते हैं।

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The driver-operator is driving home with the money, the bus operator is not ready to run the buses on the 50 percent ride
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