• July 13, 2020

दिल्ली में भाई की मौत, डॉ. की कोरोना में ड्यूटी थी, यही मुंडन करवा लिया

डाॅक्टर हमेशा लोगों के लिए वरदान रहे है। कोरोना काल मेंे तो डाक्टर्स ने और सम्मान पा लिया। नागौर में भी डाॅक्टर लगातार अपने काम में जुटे रहे। वह भी बिना छुट्‌टी रहे। हालात ऐसे बने कि इन तीन माह में उनके घरों में मां बीमार हुई या बहन के ससुराल में कोई आयोजन, डाक्टर कही नहीं जा सके। वे लगातार अपनी ड्यूटी करते रहे। जेएलएन अस्पताल में कई डॉक्टर 15 घंटे तक कोरोना संक्रमितों का उपचार करते रहे। वे अभी भी इसी काम में जुटे है। जेएलएन अस्पताल की कैंसर इकाई के स्टाफ के लिए बड़ी बात यह रही कि उनके पास बीकानेर, अजमेर अौर जोधपुर जाने वाले लोकल मरीज भी नागौर में ही रूके रहे। यह सब यहां के स्टाफ के कारण हो सका। कुछ चिकित्सक तो हर समय जेएलएन अस्पताल में ही कोरोना मरीजों के पास या उनके बारे में जानकारी लेते देखे जा सकते है। डाक्टरों का कहना था कि जब घर जाकर भी आराम ही करना है तो जेएलएन अस्पताल में मरीजों की सेवा ही करना बेहतर है। एक समय था जब जेएलएन में 110 तक मरीजों की संख्या पहुंच गई थी। यहां कुछ दिन के कोरोना पॉजिटिव मरीज से लेकर बुजुर्ग तक शामिल थे। इसके अलावा सीएचसी, पीएचसी सहित पीएमओ में लगे डाक्टरों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।कई डॉक्टरों ने 15 घंटे तक ड्यूटी की, तर्क दिया : घर पर बैठे क्या करेंगे, काम करके कोरोना मरीजों को ही संभाल लेते हैंजेएलएन अस्पताल में ही कार्यरत डॉ. वाय. एस नेगी के ताऊ के पुत्र की मौत दिल्ली में हुई। लेकिन डॉ. नेगी वहां नहीं जा सके। लेकिन उन्होंने नागौर में ही मुंडन करवा लिया। उन्होंने बताया कि कजन भाई की मृत्यु के कारण दुख हुआ। हालांकि वे लगातार परिवार के साथ मोबाइल पर संपर्क में रहे। इसके अलावा बीकानेर में उनकी माता की भी तबीयत खराब हो गई। तब भी अपने एक परिचित डॉक्टर को ही हाल चाल जानने के लिए भेजा। परिवार भी मौजूद रहा और डॉ. नेगी खुद संपर्क में रहे। इसके अलावा बीकानेर और अजमेर के कैंसर के मरीज भी जेएलएन अस्पताल ही आए। सामान्य तौर पर 30 के करीब मरीजों की औसत रहती है लेकिन अबकि बार 46 की ओपीडी रही। 10 के करीब मरीज नए भी रजिस्टर्ड हुए। यानी जेएलएन अस्पताल में चिकित्सक लगातार सेवाएं देते रहे।बच्चों को नानी के घर भेज 15 घंटे ड्यूटी कीकोरोना काल के शुरूआत के करीब 35 दिन तक कोरोना का प्रभार देख रहे जेएलएन अस्पताल में कार्यरत चेस्ट फिजिशियन कठौती निवासी डॉ. राजेंद्र बेड़ा 15 घंटे तक ड्यूटी देते रहे। उन्होंने बच्चों को नानी के घर भेज दिया और जेएलएन अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात रहे। होली के बाद से ही गांव नहीं गए। वे यहां सुबह 7 से देर रात तक ड्यूटी ही करते रहे। लेकिन जब टीम बना दी गई तो कुछ राहत मिल सकी। उन्होंने बताया कि उनके साथ डॉ. आयुष मिश्रा आदि भी जुटे रहे। तीन महीने तक डॉ. मिश्रा भी घर नहीं गए। डॉ. मिश्रा के बहन के ससुराल में जरूरी आयोजन हुआ फिर भी शरीक नहीं हुए। हालांकि उनको जहां भी काम करने के लिए नियुक्त किया गया उन्होंने किया।डॉक्टरों की सलाह : मास्क लगाए बिना नहीं निकले बाहरठठाना मीठड़ी| प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मीठड़ी पर कार्यरत डॉ. धर्मपाल सिंह राठौड़ ने डॉक्टर्स डे मनाने का महत्व बताते हुए कहा कि डॉ. जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे मरीजों का न सिर्फ इलाज करते हैं। बल्कि उन्हें एक नया जीवन भी देते हैं। इसलिए इन्हें धरती का भगवान कहां का दर्जा दिया जाता है। डॉक्टरों के समर्पण और ईमानदारी के प्रति सम्मान जाहिर करने के लिए हर साल 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि कोरोना से बचने के लिए अपनी दिनचर्या में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर योग करना, व्यायाम करना साथ ही सात्विक आहार लेना चाहिए। नित्य आहार में दाल, सेंधा नमक, गाय का दूध, गाय का घी, बादाम, काजू, शहद का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही सकारात्मक सोच रखने से मानसिक तनाव भी कम होता है, जिसे आयु की वृद्धि होती है। आज से हमें प्रण लेना है कि मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकलना और कोरोना को भगाना है। उन्होंने कहा कि कोरोना के काल में विश्व भर के डाक्टरों ने जबरदस्त काम किया। यहां तक कि हमले के दौरान भी डटे रहे। कोरोना के दौरान चिकित्सक क्वारेंटाइन में भी रहे और फिर ड्यूटी करने भी पहुंच गए। ऐसे हालात में परिवार का भी साथ रहा। डाक्टर ने काेरोना काल के दौरान बेहतरीन काम किया है। जानकारी के अनुसार जिलेभर के चिकित्सकों ने बिना कुछ लापरवाही किए अपना काम बेहद अच्छे तरीके से किया है। इस काम का लोगों ने सम्मान भी किया है। लोगोंं ने भी कोरोना के दौरान साथ दिया और साथ काम भी किया। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today

Please follow and like us:

Related post

Coronavirus Live Update

COVID-19