• July 6, 2020

फर्ज निभा रहे डॉक्टर्स बोले- मरीजों की सेवा करने से जो संतोष मिलता है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता

डॉक्टरी उनके लिए महज पेशा नहीं, पुण्य कमाने का वह अवसर है, जो ईश्वर ने उन्हें दिया है। उनका मानना है कि जीविकोपार्जन के लिए तो कोई भी विधा अपनाई जा सकती है, लेकिन सामाजिक सरोकार तो इसी से पूरे होते हैं। उनके अनुसार मरीजों की सेवा करने से जो संतोष मिलता है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। ये सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि एक ऐसा अहसास है, जिसे वे लोग जी रहे हैं। डॉक्टर्स की यह सोच कोरोना काल में मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी।ये धरती के भगवान ही थे, जिन्होंने कई कोरोना मरीजों को मौत के मुंह से बाहर निकाला और जिले में कोरोना से एक भी मौत नहीं होने दी। सीएमएचओ की टीम हो या झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के सीनियर या रेजिडेंट डॉक्टर सभी ने जिसको जो जिम्मेदारी दी, उसने उसको निभाया और एक टीम भावना से काम किया। मरीजों के इलाज में इन लोगों ने अपनी न सेहत देखी, न उम्र। मरीजों का इलाज करते करते स्वयं भी पॉजिटिव हुए, लेकिन ठीक होने पर फिर मरीजों के इलाज में जुट गए।कोरोना महामारी ने डॉक्टरी पेशे और कर्तव्य की भी परीक्षा ले ली, जिसमें रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर डॉक्टर, विशेषज्ञ आदि खरे उतरे। इन्होंने मरीजों को ही नहीं बचाया, बल्कि स्वयं को परिवार से दूर रखकर अपनों की सुरक्षा में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। भास्कर ऐसे ही डॉक्टरों से अपने पाठकों को रूबरू करवा रहा है।गंभीर मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया और एक मौत नहीं होने दी : डॉ. सोमानीएक छोटी सी पीएचसी हेमड़ा पर कार्यरत डॉ. अंकुश सोमानी कोरोना महामारी में एक योद्धा के रूप में सामने आए। इन्होंने अपने पेशे की गरिमा को बनाए रखा और रात-दिन गंभीर मरीजों पर नजर रखी। झालरापाटन में कोरोना विस्फोट हुआ तो यहां 250 से अधिक मरीज निकले।इसमें कई उम्रदराज या बीपी-शुगर जैसे रोगों से परेशान मरीज जो कोरोना वायरस से और अधिक गंभीर हों, उन पर पूरी नजर रखी। जरूरत पड़ने पर तुरंत एंबुलेंस भेजकर उनको झालावाड़ मेडिकल कॉलेज भेजा, जहां तुरंत इलाज मिला और मरीज ठीक होकर घर लौटा। उन्होंने कलेक्टर सिद्धार्थ सिहाग द्वारा दिए गए एक भी मौत नहीं हो के टास्क को पूरा करने में अहम योगदान दिया।स्वयं के पॉजिटिव होने तक की परवाह नहीं की, मरीजों का ध्यान रखा : डाॅ. अनुजाझालावाड़ मेडिकल कॉलेज की रेजिडेंट डॉ. अनुजा ने भी कोरोना महामारी में मरीजों के बीच रहकर उनका इलाज किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं के पॉजिटिव होने तक की परवाह नहीं की। उन्होंने बताया कि उनकी पहले केजुअल्टी में ड्यूटी थी, बाद में उनकी ड्यूटी कोरोना वार्ड में लगी। इस दौरान वार्ड में गंभीर मरीज भी रहे, लेकिन सीनियर डॉक्टर व अन्य साथी रेजिडेंट की मदद से मरीजों के इलाज में कोई दिक्कत नहीं आई। केजुअल्टी में किसी कोरोना मरीज के संपर्क में आने से वह स्वयं भी पॉजिटिव हो गई, लेकिन क्वारेंटाइन में रहकर ठीक हो गई और आज फिर मरीजों के बीच उनकी सेवा में जुटी हैं।सैंपलिंग की प्लानिंग से से ही झालरापाटन शहर में रोक पाए कोरोना : डाॅ. सुधानंदझालरापाटन शहर में अचानक कोरोना विस्फोट होने पर इसे रोकने में डॉ. सुधानंद का भी अहम योगदान रहा। झालरापाटन में जैसे ही एक साथ कोरोना मरीज आए तो पहले सैंपलिंग की प्लानिंग की गई। एक दिन पहले ही रात को पूरी टीम के साथ बैठकर कहां-किस एरिया में सैंपलिंग करवानी है। सुबह संक्रमित एरिया में जाकर मरीजों के सैंपल करवाए। कोई पॉजिटिव आया तो उनको तुरंत क्वारेंटाइन सेंटर या अस्पताल भेजा गया। प्रभारी डॉ. लकवाल व डॉ. शरद का भी पूरा सहयोग मिला, जिसके कारण आज झालरापाटन में कोरोना को रोक पाए हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today

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