• July 13, 2020

फिर चर्चा में चशूल; बाघ सिंह जिस चट्‌टान पर टहलते थे…महज 7 दिन में उसे ही एयर फील्ड बना दिया था

भारतीय सेना की सबसे बड़ी ताकत चशूल एयर फील्ड। 1962 के युद्ध में चीन ने हथियाने की भरसक कोशिक की। भारत-चीन विवाद के चलते दोनों देशों के कोर कमांडरों की मीटिंग के कारण चशूल आज फिर सुर्खियों में है। बीकानेर के लिए यह नाम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि चशूल का इतिहास बीकानेर के सपूत रिटायर्ड ब्रिगेडियर स्व. बाघसिंह के नाम से शुरू होता है। बाघ सिंह ने मात्र सात दिन में यह एयर फील्ड तैयार कर 29 अगस्त,1952 को देश को समर्पित कर दिया था।चशूल, सेना का एडवांस लैंड ग्राउंड है, जहां से चीन की सीमा महज 15 किमी है। हिमालय के बर्फीले पहाड़ों में 14260 फीट ऊंचाई पर स्थित है। इसकी खोज का किस्सा भी काफी रोचक है। बाघ सिंह के पुत्र इतिहासकार ठाकुर महावीरसिंह तंवर बताते हैं कि भारतीय सीमा की चीन से सुरक्षा, डोकलाम की हवाई निगरानी और युद्ध के समय चीन पर हमला करने के लिए सेना को एक हवाई पट्‌टी की जरूरत थी।सादुल लाइट इंफैक्ट्री में कमांडर बाघ सिंह तब करगिल सेक्टर में तैनात थे। उन्हें एयर फील्ड की खोज का काम सौंपा गया। वे अपनी टुकड़ी के साथ दुर्गम रास्तों से होते हुए चोटी पर जा पहुंचे। एक रात टहलते हुए दूर निकल गए। अचानक उन्हें एहसास हुआ कि वे एक ठोस पथरीली जमीन पर खड़े हैं। फिर क्या था। 22 अगस्त की सुबह सेना की टुकड़ी को काम में लगा दिया। दिन-रात एक करते हुए महज सात दिन में 3500 गज का एयर फील्ड तैयार हो गया।पहले पूर्वाभ्यास किया, फिर नेहरू को बुलायाचशूल एयरफील्ड पर तत्कालीन प्रधानमंत्रीका स्वागत करते ब्रिगेडियर बाघ सिंह।ब्रिगेडियर बाघ सिंह ने 29 अगस्त, 1952 को चशूल एयर फील्ड देश को समर्पित किया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू स्वयं वहां पहुंचना चाहते थे। ऐसे दुर्गम स्थान पर उन्हें लाना काफी जोखिम भरा था। बाघसिंह ने प्रधानमंत्री को एयर फील्ड पर लाने का पूर्वाभ्यास किया।नेहरू के साथ इंदिरा गांधी, शेख अब्दुल्ला, सरदार बलदेवसिंह और एयर मार्शल एस मुखर्जी भी थे। विश्व के सबसे ऊंचे एयर फील्ड की उपलब्धि पर सभी ने एक कागज पर साइन किए। इंदिरा गांधी को कागज रखने की जगह नहीं मिली तो उन्होंने बाघसिंह की पीठ को तख्ती बना लिया। भारत-चीन विवाद के चलते चशूल के चर्चा में आने पर ठाकुर महावीर सिंह ने उस वक्त के दुर्लभ फोटो सहित ऐतिहासिक जानकारी खास तौर पर “भास्कर’ के साथ साझा की है।चशूल पर चीन की नजर1962 के युद्ध में चीन ने चशूल को हथियाने के लिए बहुत जोर लगाया। भीषण युद्ध हुआ। चशूल की रक्षा करते हुए मेजर शैतान सिंह शहीद हो गए। मेजर धन सिंह थापा ने पिगांगसो झील की ओर से दुश्मन को खदेड़ एयर फील्ड की रक्षा की। अभूतपूर्व साहस दिखाने पर दोनों वीरों को परमवीर चक्र दिया गया था। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today

चशूल एयरफील्ड पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू व अन्य के साथ हाथ में तख्ती लिए बैठे ब्रिगेडियर बाघ सिंह।

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