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लहसुन के फायदे | Benefits of Garlic

लहसुन प्याज की जाति की वनस्पति है। इस वनस्पति में एक तीव्र गंध होती है जिसके कारन इसे एक औषधि का दर्जा दिया गया है। दुनियाभर में लहसुन का उपयोग मसाले, चटनी, सॉस, अचार तथा दवाओ के तौर पर किया जाता है।

लहसुन के औषधीय गुण

  1. सल्फर पदार्थ के होने के कारण लहसुन में एक तीव्र गंध आती है जिसके कारण इसमें रोगानुरोधक विशेषताएं भी होती है।
  2. लहसुन के तेल में गंध ज्यादा मात्रा में पाया जाता है इस, लिए इसमें औषधी तत्व होते है।
  3. लहसुन पुष्टि कर, वीर्यवर्धक, गर्म, पाचक, रेचक है।
  4. लहसुन मेधा शक्ति वर्धक है।

लहसुन के फायदे | Benefits of garlic

  1. सांस के विकार, दमा
    लहसुन दमा के रोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक साबित हो सकता है। सांस आसानी से चले, इसलिये लहसुन की एक पंखुडी गर्म करके नमक के साथ खाये। दमा कम होने लिये एक प्याली गर्म पानी में दो चम्मच शहद और १० बूंद लहसुन का रस लीजिये। सोने से पूर्व लह्सून की ३ पंखुडीया दुध में उबालकर लेने से रात में दमा की तकलीफ काफी हद तक कम हो सकती है। दमा से आराम पाने के लिये एक लहसुन बारीक पीस कर १२० मिली माल्ट व्हिनेगरमें डाल कर उबाल लीजिये। ठंडा होने के बाद छानकर, उतनी ही मात्रा में शहद मिलाकर तैयार करें । यह रसायन २ चम्मच मेथी के अर्क के साथ सोने से पूर्व लें। न्युमोनिया में आराम पाने के लिये एक लिटर पानी में एक ग्राम लहसुन और २५० मिली दूध डालकर उबालें । एक चौथाई होने तक उबालते रहें । यह दूध दिन में तीन बार लें। क्षय रोग में आराम पाने के लिये लहसुन दूध में उबाल कर लेना चाहिये, ऐसा आयुर्वेद में बताया गया है।
  2. पाचन विकार
    लहसुन शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। पाचन रस का स्त्राव अच्छा करता है जिससे आंतो की सर्पिल हलचल में गती मिलती है। किसी भी पाचन विकार में लह्सून का दुध या पानी के साथ अर्क लिया जा सकता है। आन्तों के जीवाणू संक्रमण में लहसुन के इस्तेमाल से फायदा मिलता है। यह कृमी नाशक भी है और हर रोज लहसुन के दो गांठे खाने से अत्यंत लाभ प्राप्त होता है। कोलायटीस, पेचीश में लहसुन की एक कॅप्सूल काफी है। पेट की सभी रोगों से रहत पाने के लिए लहसुन एक हिस्सा, सैन्धा नमक और घी में भुना हुआ हिंग एक चौथाई हिस्सा, अद्रक के रस के साथ लेने से बहुत लाभ मिलता है।
  3. उच्च रक्त चाप
    लहसुन के उचित उपयोग से रक्त वाहिका के उपर आनेवाला दबाव और तनाव काम हो जाता है।नाड़ी और ह्रदय के कंपन की गति कम होती है। उच्च रक्त चाप के उपचार के लिए लहसुन तेल की छह बुंदे, चार चम्मच पानी के साथ दो बार ले। बढा हुआ रक्त चाप कम करने के लिये लहसून, पुदिना, जीरा, धनिया, काली मिर्च और सैंधा नमक से बनी हुई चटनी का सेवन करना चाहिये।
  4. हृदय रोग
    लहसुन के नियमित सेवन से रक्त वाहिका में जमा हुआ कोलॅस्टेरोल (Cholesterol) आसानी से निकलने में मदद होती है और दिल का दौरा आने की संभावना कम होती है।
    यदि किसी को दिल का दौरा आने की सम्भावना है तो उसे प्रतदिन 5-6 पंखुड़ियां अवश्य लेनी चाहिए। दूध से साथ लहसुन लेना भी सेहत के लिए काफी लाभदायक है।
  5. कैंसर
    कैंसर में लहसुन का नियमित सेवन जारी रखने से सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बढती है तथा कैंसर की कोशिकाओं की बढत १३९ % से कम हो जाती है।
  6. त्वचा विकार
    कील और मुहासे कम होने के लिये चेहरे पर नियमित लहसुन लगाना चाहिए। त्वचा पर जहाँ दाद का प्रकोप हुआ है वहाँ लहसुन रगडने से वह खराब त्वचा जलकर ठीक हो जाती है। लहसुन रक्त को शुद्ध करता है तथा रक्त से विषेले तत्व को दूर करता है। जख्म और दाग दूर करने के लिये जिवाणुहीन साफ पानी में लहसुन रस 3:1 इस मात्रा में मिलाकर लगाये।

काली खांसी, रक्त दोष, गलझिल्ली, बहरापन, कुष्ठ रोग, गठीया, बवासीर, यकृत और पित्ताशय के विकार आदि रोगो के लिए भी लहसुन बहुत लाभदायक है। कामेच्छा कम होना, संभोग शक्ती कमजोर होने से लहसुन का उपयोग किया जा सकता है।

लहसुन की झाड़ी 2 – 3 फ़ीट ऊँची होती है। इसके जड़ के कंद में 5 से 35 लहसुन की पंखुडीया पायी जाती है। एक खास तरह के लह्सुनकी कंद में एक ही लह्सुन आता है जिसके ऊपर सफेद और पारदर्शक झिल्ली होती है।

सावधानी

  1. लहसुन गर्म और तेज गुणो वाला वनस्पति है। पित्त प्रकृती के लोगों को इसे वैद्य की सलाह से ही लेना चाहिए।
  2. गर्भावस्था में लहसुन न खाये।
  3. पित्त विकार में शक्कर के साथ, कफ विकार में शहद के साथ और वात विकार में घी के साथ ही लहसुन का सेवन करे।

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