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Ayurveda Health

डायबिटीज की आयुर्वेदिक दवा, जड़ी बूटी और औषधि

डायबिटीज की आयुर्वेदिक जड़ी बूटी और औषधि

  • आमलकी
    • यह जड़ी बूटी ऊर्जादायक और तीनों दोषों को साफ करने वाली है। 
    • यह कई बीमारियों के इलाज में उपयोगी है जैसे डायबिटीज जो कि अधिक संख्या में लोगों को प्रभावित करती है। बच्चे, वयस्क और बुजुर्ग सभी इस बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं में इसका इस्तेमाल सावधानीपूर्वक करना चाहिए।
    • पित्त दोष वाले व्यक्ति में आमलकी के हानिकारक प्रभाव के रूप में दस्त की समस्या हो सकती है।
       
  • गुड़मार
    • गुड़मार का मतलब है शर्करा को खत्म करने वाला। इस जड़ी-बूटी की जड़ों और पत्तों का इस्तेमाल डायबिटीज मेलिटस के इलाज में किया जाता है। रिसर्च में सामने आया है कि यह खट्टे-मीठे घोल में से मीठापन निकाल देती है और मीठा खाने की चाहत को भी कम करती है। गुड़मार से पैन्क्रियाज की कार्यक्षमता में भी सुधार आता है।
    • ​डायबिटीज मेलिटस के इलाज में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख जड़ी बूटियों में गुड़मार भी शामिल है। इसकी पत्तियां हृदय उत्तेजित करती हैं, इसलिए हृदय रोगियों को ये जड़ी बूटी देते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
       
  • करावेल्लका 
    • चूंकि ये रक्तशोधक (खून साफ करने वाली) है इसलिए मधुमेह के इलाज के लिए इसे बेहतरीन माना जाता है। इसमें विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है और ये वजन घटाने की क्षमता रखती है। 
    • डायबिटीज के इलाज में हर व्यक्ति पर ये जड़ी-बूटी अलग तरह से असर करती है। किसी अनुभवी चिकित्सक की देखरेख में ही इस जड़ी बूटी का इस्तेमाल करना चाहिए।
       
  • गुडूची
    • परिसंचरण और पाचन तंत्र के विकारों के इलाज में गिलोय की जड़ और तने का इस्तेमाल किया जाता है।
    • यह कड़वे टॉनिक की तरह काम करती है और इसमें शर्करा को कम करने की क्षमता है इसलिए यह डायबिटीज मेलिटस के उपचार में भी उपयोगी है।
       
  • मेथी
    • प्राचीन समय से ऊर्जादायक और उत्तेजक के रूप में मेथी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे मधुमेह के उपचार के लिए जाना जाता है।
    • व्यक्ति की चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर इस जड़ी बूटी की सलाह दी जाती है। गर्भवती महिलाओं में इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

मधुमेह के लिए आयुर्वेदिक दवाएं

  • फलत्रिकादी क्वाथ
    • इस काढ़े को समान मात्रा में आमलकी, हरीतकी और विभीतकी के साथ दारूहरिद्र के तने, इंद्रायण की जड़ और नागरमोथा से तैयार किया गया है।
    • ये भोजन के पाचन और भोज्य पदार्थों को तोड़कर उनके उचित अवशोषण में सुधार कर सभी प्रकार के डायबिटीज के इलाज में उपयोगी है। यह ओषधि शरीर से न पचने वाले भोजन और तत्वों को भी बाहर निकालने में मदद करती है।
       
  • कतकखदिरादि कषाय
    • कतकखदिरादि कषाय एक हर्बल काढ़ा है जिसमें एक समान मात्रा में  कटक, खदिरा, आमलकी, दारुहरिद्र, हरिद्रा, अभय और आम के बीज आदि जैसी जड़ी-बूटियां मौजूद हैं।
    • इस कषाय में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। यह वात और पित्त दोनों ही दोषों से संबंधित रोगों को नियंत्रित करता है। यह मधुमेह और डायबिटिक न्यूरोपैथी के उपचार में उपयोगी है।
       
  • निशा कतकादिकषाय
    • इसमें 12 जड़ी बूटियां जैसे कि कटक, खदिरा, आमलकी, वैरी, दारुहरिद्र, समंग, विदुला, हरिद्रा, पधि, आम के बीज, हरीतकी और नागरमोथा मौजूद हैं।
    • ये कषाय डायबिटीज के लक्षणों जैसे कि थकान, हाथों और पैरों में जलन, अत्‍यधिक प्‍यास लगना और बार-बार पेशाब आने से राहत दिलाता है। कुल मिलाकर ये जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाता है और डायबिटीज मेलिटस को नियंत्रित करने में असरकारी है। इसे अकेले या यशद भस्‍म (जिंक ऑक्‍साइड पाउडर) के साथ इस्‍तेमाल किया जाता है।
       
  • निशा-आमलकी
    • ये हल्‍दी और आंवला का मिश्रण है जिसकी सलाह आयुर्वेद में डायबिटीज के इलाज के लिए दी जातीहै। आमलकी के रस और हल्‍दी पाउडर की 1:0.5 की मात्रा में मिलाकर इसे तैयार किया जाता है।
    • इस मिश्रण से डायबिटीज में होने वाली विभिन्‍न समस्‍याओं जैसे कि डायबिटिक न्‍यूरोपैथी, नेफ्रोपैथी, रेटिनोपैथी, गैस्‍ट्रोपैथी और एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में रुकावट) को रोकने एवं नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।