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खजूर खाने के फायदे | Benefits of Eating Dates

खजूर का पेड ३०-४० फीट तक बढता है। इसका तना शाखाविहीन कठोर, गोलाकार और खुरदरा होता है। इसकी उपज रेगीस्तान में, कम पानी और गर्म मौसम की जगह में होती है। नारीयल के समान इसके पेड के ऊपरी भाग में पत्तों के नीचे, घोसलों में खजूर लगते है। हरे कच्चे खजूर पकने के बाद भुरे तथा चिपचिपे होने लगते है। खजूर सुखने के बाद वह खारक कहलाती है।

प्राकृतिक शर्करा – ८५% मात्रा
प्रोटीन (Proteins)
खनिज पदार्थ (Minerals)
रेशे (Fibre)
विटामिन A, B और C (Vitamin A, B & C)
लोह (Iron)
कॅल्शियम (Calcium)
तांबा (Copper)
प्रचुर मात्रा में पोटॅशियम (Potassium)
अल्पमात्रा में सोडियम (Sodium)

आयुर्वेद के अनुसार खजूर मधुर,पौष्टिक,बलवर्धक,श्रमहारक, संतोष दिलाने वाला, पित्तनाशक, वीर्यवर्धक और शीतल गुणों वाला है। खजूर और खारक में विटामिन, प्रोटीन, रेशे, कार्बोहाइड्रेट और शर्करा होने की वजह से उसे पूर्ण आहार कहा जाता है। इसलिये उसे सभी उपवास में शरीरके संघर्षण की आपूर्ति करने के लिये उपयोग में लाया जाता है। ताजे, हरे खजूरका रायता बनाया जाता है। खजूर की चटनी बनती है। केक और पुडींग में खजूर का उपयोग किया जाता है। खारक सूखे मेंवे का हिस्सा है। खजूर के पत्तों से घर का छप्पर, झाडू, ब्रश आदि बनाया जाता है। इसकी तने इमारतों के आधार के तौर पर उपयोगी है। इसके रेशे रस्सिया बनाने के काम आते है।
खजूर में पाये जाने वालें तत्व

  1. विटामिन A से शरीर के अंग अच्छी तरह से विकसित होते है।
  2. विटामिन B दिल के लिये लाभदायी होता है। इससे दिल की मांसपेशियां मजबूत होती है। भूख बढती है।
  3. विटामिन C से शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढती है।
  4. यक्ष्मा के रोगी की दुर्बलता दूर कर उसे बल प्रदान करता है।
  5. खजूर धातू वर्धक तथा कफनाशक है।

शक्तिवर्धक खजूर के लाभ | Benefits of Dates

मधुर, पौष्टिक, बलवर्धक, श्रम हारक और संतोष दिलानेवाला खजूर शीतल गुण वाला है। सुखाये हुए खजूर को खारक कहा जाता है। खजूर के सारे गुण खारक में पाये जाते है।

रक्तक्षय, खून की कमी (Anemia)
खून में लोह की मात्रा कम हो जाने से थकान, घबराहट, दिल की धडकन बढना जैसी तकलीफ होती है। ऐसे में इक्कीस दिन लगातार ४-५ खजूर खाने चाहिये।
पुराने एनिमिया में, दिमागको खून की आपूर्ति कम होती है। जिसके कारण भूलजाना, चक्कर आना, अवसाद आदि लक्षण पाये जाय, तो छः महिने तक आहार में ७-८ खजूर लेंवे। इससे राहत मिलती है।

गठिया
दुर्बलता में पैर दर्द तथा गठिया में, एक कप गरम दुध में एक चम्मच गाय का घी और एक चम्मच खारक पावडर मिलाकर, गर्म ही पिलाये।

महिलाओं का पैरदर्द, कमर दर्द
ज्यादातर महिलाओं में पैर दर्द, कमर दर्द की शिकायत होती है। ऐसे में ५ खजूर आधा चम्मच मेंथी के साथ दो ग्लास पानी में उबालकर आधा होने तक उबालें। गुनगुना होने के बाद पिलाये। इस से राहत मिलती है।

कब्ज
अगर सुबह पेट साफ ना होता हो, तो ५-६ खजूर रात में पानी में भिगोये। सुबह अच्छी तरह खजूर रगडकर वह पानी पिलाये। खजूर रेचक है। पेट साफ करता है।

पाचन विकार
आतों में पाचन के लिये जरुरी विशिष्ट सूक्ष्म जीवों की संख्या स खजूर से बढती है। उससे पाचन क्रिया में सुधार होता है।

आंतव्रण (Ulcer), अम्लपित्त (Acidity)
खजूर पाचन क्रिया को सुधारता है, जिससे आंतव्रण, अम्लपित्त जैसी बिमारीयां ठीक होने में मदद होती है।

शरीर सौष्ठव प्राप्त करने के लिये
1. छोटे बच्चों की अच्छी सेहत के लिये हर रोज एक खजूर, दस ग्राम चावल के पानी में पीस लें। उसी में थोडा पानी मिलाकर दिन में तीन बार पिलाये।
2. बढती उम्र के बच्चों को खारक घी में भिगोकर खिलाये। नियमित तौर पर खजूर खाने से वजन बढने में एवं शरीर बलवान होने में मदद मिलती है। घी जोडोंको स्नेहन दिलाता है, तथा खारक हड्डीयों को मजबूत करता है। तेज बढता है।
3. ढलती उम्रके लोगों को खारक और गर्म दूध नियमित तौर पर लेंनेसे शक्ती बढती है। शरीर में नया खून का निर्माण होता रहता है

सावधानी

  1. मधुमेंह के रोगी इसका उपयोग ना करे।
  2. खजूर पाचन में भारी होता है, तथा इसके अति सेवन से दस्त हो सकते है।
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दही के फायदे | Benefits of Curd

ठंडा और स्वादिष्ट दही किसे पसंद नही है? दही किसी भी चीज के साथ खाईये, उसका स्वाद बढ़ता ही है। दही ना ही सिर्फ भोजन का स्वाद बढाता है, बल्की उसे पौष्टिक भी बनाता है। इसीलिये सभी आहार विषेशज्ञ अपनी सूची में इसे अवश्य शामिल करते है।

सभी प्राणियोंम के दूध और दूध से बने पदार्थ पौष्टिक तो होते है, और इसमें दही का स्थान प्रथम है। दही के साथ खाया हुआ कुछ भी सहजता से पाचन होताहै और उस भोजन के विटामीन और प्रोटीन सरलता से अपने खून में मिल जाते है। इसीलिये दही को ‘परिपूर्ण आहार’ कहा जाता है।

रोचनं दीपनं वृष्यं स्नेहनं बलवर्धनम्।
पाकेऽम्लमुष्णं वातघ्नं मंगल्यं बृंहणं दधि। । २२५। ।
पीनसे चातिसारे च शीतके विषमज्वरे।
अरुचौ मूत्रकृच्छ्रे च कार्श्ये च दधि शस्यते। । २२६। ।
शरद्ग्रीष्मवसन्तेषु प्रायशो दधि गर्हितम्।
रक्तपित्तकफोत्थेषु विकारेष्वहितं च तत्। । २२७। ।

चरक संहिता, सूत्र स्थान २७ में दही की उपयोगिता बताई गई है। इससे दही कैसे स्वादिष्ट एवं पौष्टिक है यह पता चलता है।

(स्वाद, पाचन शक्ति, यौन शक्ति, और स्नेहन तैयार करनेवाला, ताकत और रोग प्रतिरोधक शक्ति बढानेवाला, स्तंभक, स्वाद वाला, गर्म, वातको संतुलित करनेवाला, पवित्र और पोषण बढानेवाला, श्वसन मार्ग को गीला रखनेवाला, दस्त को नियंत्रित करनेवाला, जुकाम और ज्वर, आंत्र ज्वर कम करनेवाला, भोजन का स्वाद बढानेवाला, मूत्र मार्ग की बाधा कम करनेवाला, दुर्बलता कम करनेवाला, पतझड़, गर्मी और वसंत ऋतू में अयोग्य, पुति, पित्त और कफ में विकार बढानेवाला) दहीस्वादिष्ट, दीपक, चिकना, बलवर्धक, गर्म औरपौष्टिक है।

दही के फायदे | Benefits of Curd

  1. पेट भरे रहने का अनुभव होता है।
    दही के सेवन से पेट पुरी तरह भरे रहने का अहसास लंबे समय तक बना रहता है। इसलिये दो भोजन के बीच में दही का सेवन करने से भूख नही लगती। जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है।
  2. पर्याप्त प्रोटीन से युक्त आहार
    दही में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और कॅल्शियम होता है, जो सरलता से शरीर में स्वीकार किया जाता है और शरीर की जरुरत को पूरा करता है।
  3. ऊर्जा से भरपूर आहार
    दही के सेवन से भरपूर ऊर्जा तुरंत प्राप्त होती है और भागदौड की वजह से होने वाली थकान तुरंत कम होती है। दही और शक्कर के सेवन से काम शक्ति बढती है। नपुंसकता कम होती है। शुक्राणु की संख्या और गुणवत्ता में सुधार आता है
  4. रोग प्रतिरोधक शक्ति बढती है।
    दही के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढाने वाली कोशिकाये सक्रीय होकर शरीर की रक्षा प्रणाली को मजबूती देती है। जिससे जीवाणुओंका नाश होता है और संक्रामक रोगोंसे बचा जा सकता है। दातों की सडन रोकी जाती है।
  5. मधुमेह को नियंत्रण में रखता है।
    दही से रक्त शर्करा का स्तर सही रखकर मधुमेह को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। मधुमेह में होनेवाली गुप्त अन्गों की खुजली कम होती है।
  6. पाचन क्रिया में सुधार
    दही का आसानी से पाचन होता है। उसी तरह पेट और आन्तोंके पाचक स्त्राव आसानी से तैयार होते है जिससे भारी भोजन भी सहजता से पचाया जाता है। ज्यादा तीखे, तेलवाले, मसालेदार, चटपटे भोजन के साथ दही खाया जाये तो वह भोजन तकलीफ नही देता है।
  7. दिल के बिमारी की संभावना कम होती है।
    खून के अंदर की वसा की मात्रा घटाने की क्षमता दही में होती है। इसलिये दही के सेवन से दिल के बिमारी की संभावना कम होती है। रक्तचाप नियंत्रण में रहता है।
  8. विटामिन से भरपूर
    विटामिन बी ५, बी १२ जैसे विटामिन की प्रचुर मात्रा दही में होने से वह खून में हिमोग्लोबिन बढ़ाता है। और तंत्रिका तंत्र स्वस्थ रहता है। कॅल्शियम और विटामिन डी दांत और हड्डियो को मजबूत रखता है। कशेरूकाओं का स्वास्थ्य सुधारता है।
  9. आन्तों का स्वास्थ्य सुधारता है।
    लॅक्टो बॅक्टेरीया आदि आन्तोंके स्वास्थ्य के लिये पोषक जीवाणु दही में पाये जाते है जो आन्तों का स्वास्थ्य सुधारते है। आन्तों का कैन्सर होने की संभावना कम होती है। पेट रोज साफ होता है।
  10. चेहरा, त्वचा चमकती है।
    शहद, बदाम तेल के साथ दही मिलाकर, चेहरे पर और त्वचा पर १५ मिनिट तक लगाकर रखनेसे त्वचा की मृतऔर खराब कोशिकाये निकल जाती है। त्वचा पर निखार आता है। संतरे के छिलके के साथ दही लगानेसे रंग गोरा होता है। गुलाब जल और हल्दी के साथ मिलाकर दही लगाने से त्वचा में निखार आता है और मुलायम होती है। नीम्बू रस और दही को मिलाकर लगाने से चेहरे और त्वचा की झुर्रिया कम होती है।
  11. बालों के लिये उपयोगी।
    बालोंको दही लगाकर तीस मिनिट तक रखिये औरफिर थंडे पानी से धोईये। बाल मुलायम और रेशमी होते है। मेहंदी के साथ लगाने से और बेहतर परिणाम दिखते है। दही के साथ काली मिर्च पावडर बालों को सप्ताह में दो बार लगाने से बालोंकी रूसी कम होती है। बालों की जड़ को दही के साथ बेसन मिलाकर लगाने से बालों का झड़ना कम होता है।
  12. मानसिक स्वास्थ्य के लिये
    नियमित तौर पर भोजन में दही का सेवन करने से, मस्तिष्क में सकारात्मकता बढाने वाली कोशिकाओ की रासायनिक प्रक्रिया में वृद्धी होकर चिंता, नकारात्मक विचार और उदासीनता कम होकर मानसिक स्वास्थ्य बना रहता है, यह वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित हुआ है।

**दही – दही, चक्का, पनीर, छास, मठ्ठा, कढी इस रूप में, और साथ साथ रायता, दहीवडा, श्रीखंड आदि के जरीये हमारे भोजन में शामिल है।

**उंट, बकरी, भैस और गाय के साथ साथ बाकी सभी दूध देने वालेजानवरो के दूध से दही बनाकर उपयोग में लाया जाता है। आजकल सोयाबीन और नारियल के दूध का दही कुछ रोगियो के लिये उपयोग करते है।

सभी दूध देनेवाले जानवरो में ‘भारतीय नस्ल की गाय’ दूध, दही के लिये स्वास्थ्य के तौर पर सर्वश्रेष्ठ है। विदेशी नस्ल की और संकरीतगाय सिर्फ A1 प्रोटीन युक्त दूध देती है। इस A1 प्रोटीन से मधुमेह, कैंसर, दिल की बिमारी और मानसिक तनाव, उदासीनता जैसी बिमारीया बढती है, यह बात सिद्ध हो चुकीहै। सिर्फ भारतीय नस्ल की गाय ही ए-2 प्रोटीन युक्त दूध देती है, जिससे इन बिमारियो का प्रतिरोध होता है। इन गायों का आहार प्राकृतिक होने की वजह से इनके दूध से रोग प्रतिरोधक शक्ति बढती है, ऊर्जा और शक्ति प्राप्त होती है। इसीलिये आयुर्वेदिक चिकित्सा में इस दूध के साथ काफी औषधीया ली जाती है। इसका घी भी औषधी गुनो से परिपूर्ण है। गोमुत्र में रोग प्रतिरोधक शक्ति प्रचुर मात्रामें है। गोबर भी रोगाणु संक्रमण कम करता है, उसी तरह एक श्रेष्ठ उर्वरक है। इस तरह इन गायोंका पंच गव्य (दूध, दही, घी, गोबर और मुत्र) अपनी दैनिक गतिविधियो के लिये और कृषि के लिये बहुत ही उपयुक्त है। इस गाय के दूध में उपर बताये गये सभी लाभ प्रचुरता से प्राप्त होते है। इसलिये इसके दही का विशेष महत्व है।

सावधानी

  1. कच्चे दही का सेवन कभी ना करे। उससे त्रिदोष असंतुलित होते है।
  2. संभवतः रातमे दही का सेवन ना करे। अगर खाना ही पडे तो उसमें शक्कर या काली मिर्च पावडर मिलाकर खाने से पित्त प्रकोप से बचा जा सकता है।
  3. दही से भोजन की मात्रा बढ सकती है। उसी तरह दही पौष्टिक होने से वजन बढ सकता है।
  4. दही में संपृक्त वसा होने से दिल की बिमारी में और टाईप-२मधुमेह में घातक हो सकता है।
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Ginger | अदरक

अदरक स्वाद में तीखी होती है। अदरक पाचक, चिड़चिड़ापन दूर करने वाली एक अध्भुत औषधि है। यह पीड़ानाशक और स्वादिष्ट होती है तथा वायू और कफ का नाश करती है। अदरक जमीन के नीचे पाई जानेवाली, ढाई से तीन फीट उचाई की झाडी की,पीले रंग की जड़ होती है। अदरक लंबे समय तक उपयोगी बनी रहे उस के लिये उसे धूप में सुखाया जाता है। कुछ जगह दूध में डूबोकर सूखने के बाद उसका सौन्ठ बनाया जाता है। सौन्ठ अदरक से भी ज्यादा गरम होती है। सौन्ठ से तेल निकाला जाता है। अगर आप अदरक को लम्बे समय तक संभल कर रखना चाहते हैं, तो उसे गीली मिट्टी में भी दबा कर रखा जा सकता है। मसाले और दवा के तौर पर अदरक को दुनियाभर में उपयोग किया जाता है। अदरक दवा के रूप में बहुत ही परिणामकारक सिद्ध हुआ है, इसलिये उसे ‘महाऔषधी’ कहा जाता है।

१० ग्राम ताजे अदरक के रस में पदार्थ

पानी ( Water) – ८०.९%वसा (Fats) – ०.९%
कार्बोहायड्रेड्स (Carbohydrates) – १२.३%कॅल्शियम (Calcium) – २ मि.ग्रॅ.
रेशा (Fibre) – २.४%फोस्फरस (Phosphorus) – ०.६० मि.ग्रॅ.
प्रोटीन्स (Proteins) – २.३%लोह (Iron) – ०.२६ मि.ग्रॅ.
खनिज (Minerals) – १.२%विटामिन सी (Vitamin C) – ०.६ मि.ग्रॅ.

अदरक के फायदे
पाचन विकार के लिए: पाचन विकारों में अदरक मदद कर सकता है.
1. अपच (Indigestion), खानेकी अनिच्छा, पेट में गैस होना, उल्टी होना, कब्ज होना आदि के लिये।
2. एसिडिटी के लिए बहुत फायदेमंद।
3. जी मचलना, छाती में जलन, खट्टी डकार आदि के लिये।
4. खाना खाने के पूर्व अदरक का टुकड़ा नमक के साथ चबा चबाकर खाये।
5. आधा चम्मच अदरक का रस, सम मात्रा में शहद और नीम्बू का रस मिलाकर दिन में तीन बार ले।
6. अदरक, सैन्धा नमक, काली मिर्च और पुदीने की चटनी भोजन के साथ ले।
7. सुबह शाम खाली पेट अदरक का छोटा सा टुकड़ा और उतना ही नमक चबा चबा कर उसे निगल ले। आधे घंटे तक कुछ ना खाये पिये। रात को सोने से पूर्व ठंडा दुध शक्कर मिलाकर पिये। यह उपाय इक्कीस दिनो तक करे। पुरानी पित्त की तकलीफ भी दूर हो जाती है।

सांस विकार के लिए
1. सर्दी, जुकाम, पुरानी काली खांसी, क्षयरोग, कफ, दमा आदि के लिये।
2. अदरक का रस शहद के साथ दिन में तीन बार लें।
3. अदरक के टुकडे पानी में उबालकर, जरूरत के अनुपात में शक्कर मिला कर वह पानी गरम करके पीना चाहिये। अदरक की चाय लीजिये।
4. अदरक का रस दुगने अनुपात में मिश्री या गुड के साथ मिलाकर चटवाये।
5. सौन्ठ तथा उससे चार गुना मिश्री का काढा लेने से कफ पतला होने में मदद होती है।

स्त्री रोग के लिए
स्त्रीरोग संबंधी समस्याओं को हल करने के लिए अदरक के प्रयोग।
1. अनियमित मासिक स्त्राव, पेट दर्द के लिये अदरक ड़ालकर उबाला हुआ पानी दिन में तीन बार लीजिये।
2. प्रसव के बाद होनेवाली इंद्रिय शिथिलता के लिये सौन्ठ पाक दिया जाता है।

वेदना शामक
वेदना कम करने के लिए अदरक के प्रयोग
1. अदरक को पानी के साथ पीसकर वह लेप माथे पर या जहां दर्द हो रहा हो वहा लगाये। ताज़ा जखमों पर ना लगाये।
2. दांत के दर्द में, अदरक का टुकड़ा दांत में पकड कर रखें।
3. कान के दर्द में, दो बूंद अदरक का रस कान में ड़ाले।
4. गठीया में कद्दूकस किया हुआ अदरक गरम करके लगाये।

आयुर्वेद के अनुसार शरीर में अनेक मार्ग है जिन्हे ‘स्त्रोतज’ कहां जाता है।अदरक की मदद से उन मार्गो का अवरोध दूर किया जा सकता है।
सावधानी:
अदरक उष्ण गुणधर्मी है, इसलिये गर्मी में कम उपयोग किया जाये।
उच्च रक्त चाप, अल्सर, रक्तपित्त आदि में अदरक का उपयोग ना करे।

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दालचीनी के फायदे | Health Benefits of Cinnamon

दालचीनी के फायदे | Health Benefits of Cinnamon in Hindi

दालचीनी का पेड हमेशा हराभरा तथा छोटी झाड़ी जैसा होता है। उसके तने की छाल चुनकर सुखाई जाती है। उनका आकार कवेलू जैसा गोलाकार, जाडा, मुलायम तथा भुरे लाल रंग का होता है। दालचीनी के पेड़ से हमेशा सुगंध आती है। इसका उपयोग मसालो और दवा के तौर पर किया जाता है। इसका तेल भी निकाला जा सकता है। दालचीनी के पेड़ को पत्तों का उपयोग खाने में मसाले की तरह किया जाता है। इन्हे तेजपत्ता भी कहा जाता है।

पाचन में सुधार लाने और जठर संबधी विकारों के लिए इन 4 अलग-अलग तरीकों से दालचीनी का उपयोग कर सकते है।

अपच, पेटदर्द और सीने में जलन महसूस होने पर आप दालचीनी, सौन्ठ, जीरा और इलायची सम मात्रा में लेकर पीसकर गरम पानी के साथ ले सकते हैं।

दालचीनी, काली मिर्च पावडर और शहद आदि मिलाकर भोजन के बाद लेने से पेट अफारा नहीं होता।

दालचीनी से जी मचलना, उल्टी और जुलाब रुकते है।

कब्ज और गैस की समस्या कम करने के लिये दालचीनी के पत्तों का चूर्ण और काढा बना कर लिया जाता है।

  • वीर्य वृद्धि के लिये दालचीनी पाउडर सुबह शाम गुनगुने दूध के साथ ले।
  • ठंड की वजह से सिरदर्द हो तो दालचीनी पानी के साथ पीसकर सिरपर लगाये।
  • मुह की दुर्गंध और दांत की दवा में दालचीनी का उपयोग किया जाता है।
  • मुहांसे कम करने के लिये दालचीनी का चूर्ण नींबू के रस में मिलाकर लगाये।
  • खसरा निवारक के तौर पर दालचीनी का उपयोग किया जाता है।

दालचीनी के पदार्थ | Ingredients in Cinnamon

प्रोटीन | Protienथायामीन |Thayamin
कार्बोहायड्रेट |Carbohydrateरिबोफ्लेविन |Reboflewin/td>
फॉस्फरस |Phosphorusनिआसीन | Niasin
सोडियम |Sodiumजीवनसत्व ‘अ’ & ‘क’ | Vitamin A & C
पोटॅशियम | Potassiumनमी & एश

दालचीनी स्वाद में तिखी मिठी होती है। दालचीनी ऊष्ण, दीपन, पाचक, मुत्रल, कफनाशक, स्तंभक गुणधर्मो वाली है। मन की बेचैनी कम करती है। यकृत के कार्य में सुधार लाता है। स्मरण शक्ती बढाती है।

सावधानी | Precautions to take while using Dalchini

  • दालचीनी उष्ण गुणधर्म की है, इसलिये गर्मी के दिनोमें कम उपयोग करें।
  • दालचीनीसे पित्त बढ सकता है।
  • ऊष्ण प्रकृती के लोग चिकित्सक से सलाह ले।