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अनिद्रा (नींद न आना) – Insomnia in Hindi

अनिद्रा (नींद न आना) क्या है?

अनिद्रा एक नींद से सम्बन्धित समस्या है, जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है। संक्षेप में, अनिद्रा से पीड़ित व्यक्तियों के लिए नींद आना या सोते रहना मुश्किल होता है। अनिद्रा के प्रभाव बहुत भयंकर हो सकते हैं। 

अनिद्रा आमतौर पर दिन के समय नींद, सुस्ती, और मानसिक व शारीरिक रूप से बीमार होने की सामान्य अनुभूति को बढाती है। मनोस्थिति में होने वाले बदलाव (मूड स्विंग्स), चिड़चिड़ापन और चिंता इसके सामान्य लक्षणों से जुड़े हुए हैं। 

अनिद्रा में नींद से जुड़े विकारों की एक विस्तृत श्रृंखला है, जिसमें अच्छी नींद के अभाव से लेकर नींद की अवधि में कमी से जुडी समस्याएं हैं। अनिद्रा को आमतौर पर तीन प्रकारों में विभाजित किया जाता है –

  1. अस्थायी अनिद्रा – यह तब होती है, जब लक्षण तीन रातों तक रहते हैं।
  2. एक्यूट अनिद्रा –  इसे अल्पकालिक अनिद्रा भी कहा जाता है। लक्षण कई हफ्तों तक जारी रहते हैं।
  3. क्रोनिक अनिद्रा – यह आमतौर पर महीनों और कभी-कभी सालों तक रहती है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, क्रोनिक अनिद्रा के ज़्यादातर मामले किसी अन्य प्राथमिक (primary) समस्या से उत्पन्न दुष्प्रभाव होते हैं।

अनिद्रा रोग किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। यह वयस्क पुरुषों की तुलना में वयस्क महिलाओं में अधिक आम है। नींद विकार स्कूल और काम के प्रदर्शन को कमजोर कर सकता है। साथ ही, यह मोटापे, चिंता, अवसाद, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की समस्याओं, याददाश्त से जुडी समस्याओं, प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) की कार्यक्षमता को कमज़ोर और प्रतिक्रिया समय (reaction time) को कम करने का कारण बनता है।

अनिद्रा रोग दीर्घकालिक बीमारियों के होने के जोखिम को बढ़ाता है। अमेरिका की राष्ट्रीय निद्रा फाउंडेशन (National Sleep Foundation) के मुताबिक 30-40 प्रतिशत अमेरिकी वयस्कों का कहना  है कि उनमें पिछले 12 महीनों में अनिद्रा के लक्षण उत्पन्न हुए हैं और 10-15 प्रतिशत वयस्कों का दावा है कि उन्हें क्रोनिक अनिद्रा है।

अनिद्रा के कारणों में  मनोवैज्ञानिक कारक, दवाएं और हार्मोन का स्तर शामिल है।

अनिद्रा का उपचार चिकित्सकीय या व्यावहारिक हो सकता है।

अनिद्रा से ग्रसित लोगों में काम पर ध्यान केंद्रित करने और एकाग्रता से जुडी समस्याएं सामान्य हैं। अमेरिका की राष्ट्रीय हृदय, फेफड़े और रक्त संस्थान (National Heart, Lung and Blood Institute) के अनुसार, 20 प्रतिशत गैर-अल्कोहल से संबंधित कार दुर्घटनाएं ड्राइवर द्वारा झपकी लेने के कारण होती हैं।

लघु जीवन प्रत्याशा (Shortened life expectancy)

अनिद्रा के कारण आपकी जीवन प्रत्याशा कम हो सकती है। 16 अध्ययनों के एक विश्लेषण में 10 लाख से अधिक प्रतिभागियों और 112,566 मौतों के अंतर्गत नींद की अवधि और मृत्यु दर के बीच के संबंध को जाँचा गया। उसमें पाया कि जो लोग हर रात सात से आठ घंटे सोते थे, उनकी तुलना में कम सोने वाले व्यक्तियों में मृत्यु का खतरा 12 प्रतिशत ज़्यादा था।

हाल ही में हुए एक अध्ययन में 38 सालों से सतत अनिद्रा और मृत्यु दर के प्रभावों को जाँचा गया। उसमें पाया कि सतत अनिद्रा से ग्रसित लोगों की मौत का जोखिम 97% अधिक था।

अनिद्रा (नींद न आना) के प्रकार – Types of Insomnia in Hindi

अनिद्रा के प्रकार – होने के कारण के आधार पर

अनिद्रा को उसके होने के कारण आधार पर तीन प्रकार में वर्गीकृत किया जाता है – प्राथमिक अनिद्रा (Primary insomnia), माध्यमिक अनिद्रा (Secondary insomnia),अस्थायी या क्षणिक अनिद्रा (Transient insomnia)

1. प्राथमिक अनिद्रा –

प्राथमिक अनिद्रा में व्यक्ति को नींद की समस्याएं होती हैं, जो किसी भी अन्य स्वास्थ्य समस्या से प्रत्यक्ष रूप से नहीं जुडी होती हैं।

2. माध्यमिक अनिद्रा – 

माध्यमिक अनिद्रा का अर्थ है कि व्यक्ति को होने वाली नींद की समस्याएं किसी अन्य कारण की वजह से होती हैं, जैसे कि स्वास्थ्य समस्या (अस्थमा, अवसाद, गठिया, कैंसर, या सीने में जलन), दर्द; उसके द्वारा ली जाने वाली दवाएं या उसके द्वारा शराब जैसे पदार्थ का सेवन करना।

3. क्षणिक या अस्थायी  अनिद्रा –

यह तब होती है, जब लक्षण तीन रातों तक रहते हैं।

अनिद्रा रोग के प्रकार – अवधि के आधार पर

अनिद्रा की अवधि भी भिन्न होती हैं। अवधि के आधार पर अनिद्रा के दो प्रकार हैं – एक्यूट अनिद्रा (अल्पकालिक), क्रोनिक अनिद्रा (दीर्घकालिक)।

1. एक्यूट अनिद्रा –

यह अल्पकालिक हो सकती है। तीव्र अनिद्रा एक रात से लेकर कुछ हफ्तों तक रह सकती है।

2. क्रोनिक अनिद्रा – 

यह एक लंबे समय के लिए रह सकती है। जब व्यक्ति को एक महीने या उससे अधिक समय तक एक सप्ताह में कम से कम तीन रातों तक अनिद्रा होती है, तो उसे ‘दीर्घकालिक अनिद्रा’ कहा जाता है। 

अनिद्रा (नींद न आना) के लक्षण – Insomnia Symptoms in Hindi

अनिद्रा के लक्षण क्या होते हैं?

चिकित्सक अनिद्रा के साथ कई अन्य संकेतों और लक्षणों को भी जोड़ देते हैं। अक्सर ये लक्षण अन्य चिकित्सकीय या मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों में उलझन पैदा कर सकते हैं।

1. अनिद्रा से ग्रसित कुछ लोग अक्सर रात में नींद न आने और पूरी रात जागने की शिकायत कर सकते हैं। समस्या तनाव से शुरू हो सकती है। जब आपकी नींद न आने की अक्षमता बिस्तर के साथ जुड़ना शुरू हो जाती है, तब ये समस्या गंभीर हो सकती है।

2. ज़्यादातर दिन में दिखाई देने वाले लक्षण लोगों को चिकित्सकीय देखभाल के लिए प्रेरित कर सकते हैं। अनिद्रा के कारण दिन में होने वाली समस्याओं में निम्नलिखित शामिल हैं –

  1. हीन एकाग्रता और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता।  
  2. याददाश्त कमज़ोर होना।  
  3. कुसमायोजित (uncoordinated) हो जाना।  
  4. चिड़चिड़ापन
  5. सामाजिक रूप से मिलना-जुलना बंद कर देना। 
  6. थके होने और पर्याप्त नींद न लेने के कारण होने वाली मोटर वाहन दुर्घटनाएं। 

3. दिन में दिखाई देने वाले इन लक्षणों का इलाज स्वयं करने के प्रयासों द्वारा लोग इन लक्षणों को बदतर बना सकते हैं। इन प्रयासों में शामिल हैं – 

  1. शराब पीना या एंटीथिस्टामाइन (antihistamines) लेना नींद न आने की समस्याओं को और बदतर कर सकता है।
  2. कुछ अन्य लोग बिना डॉक्टर से परामर्श किये नींद की गोलियाँ लेने की कोशिश करते हैं।

नींद न आने (अनिद्रा) के कारण – Insomnia Causes in Hindi

अनिद्रा के कारण क्या होते हैं? 

अनिद्रा प्राथमिक समस्या हो सकती है या अन्य स्थितियों से जुडी हो सकती है। अनिद्रा आमतौर पर तनाव, जीवन की घटनाओं या आदतों का परिणाम होती है, जिससे नींद में बाधा आती है। मुख्य कारणों का इलाज करने से अनिद्रा का समाधान हो सकता है, लेकिन कभी-कभी इसमें कई साल लग जाते हैं। 

क्रोनिक अनिद्रा के सामान्य कारणों में शामिल हैं –

  1. तनाव – ऑफिस, स्कूल, स्वास्थ्य, आर्थिक या परिवार से जुडी हुई समस्याएं रात में आपके मस्तिष्क को सक्रिय रख सकती हैं, जिसके कारण सोना मुश्किल हो जाता है। तनावपूर्ण जीवन की घटनाएं या मानसिक परेशानी, जैसे आपके किसी करीबी व्यक्ति की मृत्यु या बीमारी, तलाक या नौकरी छूट जाना–  के कारण अनिद्रा हो सकती है।  
  2. यात्रा या काम की समय-सारणी (schedule) – आपकीसिरकेडियन रिदम (circadian rhythm) एक आंतरिक घड़ी के रूप में कार्य करता है, जो आपके सोने-जागने के चक्र, चयापचय और शरीर के तापमान का मार्गदर्शन करती है। आपके शरीर के सिरकेडियन रिदम के बिगड़ने से अनिद्रा हो सकती है। इसके कारणों में विभिन्न समय क्षेत्रों (time zones) में हवाई यात्रा करना, जल्दी या देर वाली पारी (शिफ्ट) में काम करना या पारी (शिफ्ट) का बार-बार बदलना शामिल हैं।
  3. सोने की ख़राब आदतें – सोने की ख़राब आदतों में सोने का अनियमित समय, दिन में सोना, सोने से पहले उत्तेजक गतिविधियों, सोने के लिए उचित वातावरण का अभाव और अपने बिस्तर पर बैठकर खाना या टीवी देखना शामिल हैं। सोने से पहले कंप्यूटर, टीवी, वीडियो गेम, स्मार्टफ़ोन या अन्य स्क्रीन आपके नींद के चक्र में हस्तक्षेप कर सकते हैं।
  4. शाम को अधिक मात्रा में भोजन करना – सोने के समय से पहले हल्का भोजन करना ठीक है, लेकिन बहुत अधिक खाने से आपको सोते समय शारीरिक रूप से असहज महसूस हो सकता है। बहुत से लोग सीने में दर्द का अनुभव करते हैं। एसिड और भोजन का बैकफ्लो पेट से भोजन नलिका (esophagus) की ओर होने लगता है, जिसके कारण आप जागते रह सकते हैं।

क्रोनिक अनिद्रा भी चिकित्सकीय परिस्थितियों या कुछ दवाओं के उपयोग के साथ संबंधित हो सकती है। चिकित्सकीय परिस्थितियों का इलाज करने से नींद में सुधार हो सकता है, लेकिन चिकित्सा की स्थिति में सुधार के बाद अनिद्रा जारी रह सकती है।

अनिद्रा के अतिरिक्त सामान्य कारणों में शामिल हैं –

  1. मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकार – चिंता संबंधी विकार, जैसे कि पोस्ट-ट्रॉमैटिक तनाव विकार आपकी नींद को बाधित कर सकते हैं। बहुत जल्दी जाग जाना अवसाद का संकेत हो सकता है। अनिद्रा अक्सर अन्य मानसिक स्वास्थ्य विकारों के साथ भी होती है।
  2. दवाएं कई निर्धारित (prescription) दवाएं नींद में हस्तक्षेप कर सकती हैं, जैसे कि अस्थमा के लिए दवा, हाई बीपी के लिए दवा, या एंटीडिप्रेसेंट दवाएं। कई ओवर-द-काउंटर दवाएं (बिना प्रिस्क्रिप्शन के मिलनी वाली दवाएं , जैसे कि कुछ दर्द की दवाएं, एलर्जी और जुकाम की दवा तथा वजन घटाने के उत्पादो में – कैफीन और अन्य उत्तेजक होते हैं, जो नींद को बाधित कर सकते हैं।
  3. चिकित्सकीय परिस्थितियाँ – अनिद्रा से जुड़ी स्थितियों के उदाहरणों में क्रोनिक दर्द, कैंसर, शुगर (डायबिटीज), हृदय रोग, अस्थमा, गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी; GERD), अतिसक्रिय थायरॉयड, पार्किंसंस रोग और अल्जाइमर रोग शामिल हैं। 
  4. नींद से संबंधित विकार स्लीप एपनिया आपको रात में समय-समय पर सांस लेने से रोकता है, जिसके कारण आप सो नहीं पाते। रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम आपके पैरों में अजीब सी सनसनी पैदा करता है और न चाहते हुए भी आपको आपको अपने पैर बार-बार हिलाने के लिए विवश होना पड़ता है। ऐसी स्थिति में आप सो नहीं पाते हैं।
  5. कैफीन, निकोटीन और शराब – कॉफी, चाय, कोला और अन्य कैफीन युक्त पेय उत्तेजक होते हैं। दोपहर के बाद या शाम को इन्हें पीने से आपकी नींद बाधित होती है। तंबाकू उत्पादों में निकोटीन एक और उत्तेजक है, जो नींद में हस्तक्षेप कर सकता है। शराब आपको सोने में मदद कर सकती है, लेकिन यह गहरी नींद को रोकती है और अक्सर आप आधी रात में जाग जाते हैं।  

नींद न आने (अनिद्रा) से बचाव – Prevention of Insomnia in Hindi

अनिद्रा की रोकथाम

सोने की अच्छी आदतें अनिद्रा को रोकने और गहरी नींद सोने में मदद कर सकती हैं –

  1. सप्ताहांत के साथ-साथ अपने हर दिन के सोने और जागने के समय को एक जैसा रखें।
  2. सक्रिय रहें। नियमित की गयी गतिविधियाँ रात में अच्छी नींद के लिए महत्वपूर्ण होती हैं।
  3. अपनी दवाओं की जाँच करें और देखें कि क्या उनकी वजह से ही आपको अनिद्रा की बीमारी हुई है या नहीं।
  4. अल्पनिद्रा या झपकी लेने से बचें। 
  5. कॉफ़ी और अल्कोहल से बचें या सीमित मात्रा में सेवन करें। धूम्रपान का उपयोग न करें।
  6. सोने से पहले अधिक मात्रा में भोजन करने और पेय पदार्थों से बचें।
  7. अपने बेडरूम को आरामदायक बनाएं और केवल सेक्स करने या सोने के लिए इसका इस्तेमाल करें।
  8. आरामपूर्वक तरीके से सोने के लिए कुछ आदतें अपना सकते हैं, जैसे – सोने से पहले स्नान करना, किताबें पढ़ना या धीमी आवाज़ में संगीत सुनना।

अनिद्रा (नींद न आना) का परीक्षण – Diagnosis of Insomnia in Hindi

अनिद्रा का निदान 

डॉक्टर एक पूर्ण चिकित्सकीय इतिहास के साथ अनिद्रा का मूल्यांकन शुरू करेंगे। संपूर्ण चिकित्सकीय मूल्यांकन के साथ एक पूर्ण चिकित्सा इतिहास और शारीरिक परीक्षण, अनिद्रा के मूल्यांकन और उपचार के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

आपकी स्थिति के आधार पर अनिद्रा के निदान और इसके कारणों की खोज में शामिल हो सकते हैं –

  1. शारीरिक परीक्षण – यदि अनिद्रा का कारण अज्ञात है, तो चिकित्सकीय समस्याओं के लक्षणों को देखने के लिए जो अनिद्रा से संबंधित हो सकते हैं, आपके डॉक्टर शारीरिक परीक्षण कर सकते हैं। कभी-कभी थायरॉयड समस्याओं या अन्य स्थितियों की जाँच करने के लिए रक्त परीक्षण किया जा सकता है, जो नींद की कमी से जुड़ा हो सकता है।
  2. नींद की आदतों की समीक्षा – आपकी नींद से संबंधित प्रश्न पूछने के अलावा डॉक्टर आपके सोने-जागने का पैटर्न और दिन में आने वाली नींद का स्तर निर्धारित करने के लिए आपको एक प्रश्नावली भरने के लिए दे सकते हैं। आपको कुछ हफ्तों तक स्लीप डायरी (इस डायरी में व्यक्ति दैनिक रूप से अपने सोने और जागने के समय और पैटर्न का रिकॉर्ड रखता है) रखने के लिए भी कहा जा सकता है।  
  3. नींद का अध्ययन – यदि आपकी अनिद्रा का कारण स्पष्ट नहीं है या आपके अंदर किसी अन्य नींद की बीमारी, जैसे कि स्लीप एपनिया या रेस्टलेस लेग सिंड्रोम के लक्षण दिख रहे हैं, तो आपको स्लीप सेंटर (जहाँ नींद की बीमारियों का इलाज किया जाता है) में एक रात बिताने की आवश्यकता हो सकती है। जब आप सोते हैं, तो आपकी मस्तिष्क तरंगों, श्वास, दिल की धड़कन, आँखों और शरीर की अन्य गतिविधियों की निगरानी और रिकॉर्ड के लिए टेस्ट किये जाते हैं।

आपके डॉक्टर पूर्ण चिकित्सा इतिहास के साथ अनिद्रा का मूल्यांकन शुरू कर देंगे। चिकित्सकीय मूल्यांकन के साथ, एक पूर्ण चिकित्सा इतिहास और शारीरिक परीक्षण, अनिद्रा के मूल्यांकन और उपचार के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

नींद न आने (अनिद्रा) का इलाज – Insomnia Treatment in Hindi

अनिद्रा का उपचार क्या है?

आपकी नींद की आदतों को बदलकर और अनिद्रा से संबंधित किसी भी समस्या का पता लगाकर (जैसे कि तनाव, चिकित्सकीय स्थितियाँ या दवाइयां) कई लोगों की आरामदायक नींद को लौटाया जा सकता है। यदि ये उपाय काम नहीं करते हैं, तो आपके डॉक्टर तनाव से मुक्ति दिलाने और नींद में सुधार करने के लिए संज्ञानात्मक व्यावहारिक थेरेपी (cognitive behavioral therapy), दवाओं या दोनों का सुझाव दे सकते हैं।

1. अनिद्रा के लिए संज्ञानात्मक व्यावहारिक थेरेपी (Cognitive Behavioral Therapy for Insomnia)

अनिद्रा के लिए की जाने वाली संज्ञानात्मक व्यावहारिक थेरेपी (CBT-I) नकारात्मक विचारों और क्रियाओं को नियंत्रित करने में आपकी मदद कर सकती है, जो आपको जगाते रहते हैं। आमतौर पर अनिद्रा से ग्रसित लोगों के लिए उपचार की पहली सीढ़ी के रूप में इस थेरेपी की सिफारिश की जाती है। सामान्य तौर पर, सीबीटी-आई (CBT-I) नींद की दवाओं के समान या अधिक प्रभावी है। सीबीटी-आई का संज्ञानात्मक हिस्सा आपको उन कारणों को पहचानना और बदलना सिखाता है, जो आपकी सोने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। यह नकारात्मक विचारों और चिंताओं को नियंत्रित करने में आपकी मदद कर सकता है, जो आपको जगाते हैं। यह उस चक्र को दूर करने में भी शामिल हो सकता है, जहाँ आपको सोते वक़्त इस बात की चिंता होती है कि आपको नींद नहीं आएगी।

सीबीटी-आई का व्यावहारिक हिस्सा आप में अच्छी नींद की आदतों को विकसित करने और ऐसे व्यवहारों को दूर करने में मदद करता है, जो आपकी नींद को बाधित करते हैं। इन रणनीतियों में निम्नलिखित उदाहरण शामिल हैं –

  1. उद्दीपन नियंत्रण चिकित्सा (Stimulus control therapy) – यह विधि उन कारकों को दूर करने में मदद करती है, जो आपके मस्तिष्क को नींद का विरोध करने के लिए तैयार करते हैं। उदाहरण के लिए आप सोने और जागने का एक नियत समय तय कर करें और दिन में सोने से बचें। केवल सोने और सेक्स करने के लिए बिस्तर का उपयोग करें। अगर आपको लेटने के 20 मिनट के भीतर नींद नहीं आती, तो बाहर चले जाएं और जब नींद आये, तभी अपने बैडरूम में वापस आएं।
  2. विश्राम तकनीकें (Relaxation techniques)  प्रोग्रेसिव मांसपेशीय विश्राम (Progressive muscle relaxation), बायोफीडबैक (biofeedback) और श्वसन सम्बन्धी व्यायाम, सोने के समय होने वाली चिंता को कम करने के तरीके हैं। इन तकनीकों का अभ्यास करने से आपको अपनी श्वास, हृदय गति, मांसपेशियों में तनाव और मूड को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है, ताकि आप आराम कर सकें।
  3. नींद पर रोक – यह उपचार आपके बिस्तर में बिताए जाने वाले समय को घटाता है और दिन की नींद से बचाता है, जिससे आंशिक नींद का अभाव होता है और आप अगली रात बहुत थका हुआ महसूस करते हैं। एक बार आपकी नींद में सुधार हो जाये, तो आपके सोने का समय धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है।
  4. निष्क्रिय अवस्था में जागृत रहना – इसे “विरोधाभासी उद्देश्य” (paradoxical intention) भी कहा जाता है। इस चिकित्सा का उद्देश्य अनिद्रा से ग्रस्त व्यक्तियों की चिंता को कम करना है, जो उन्हें बिस्तर में लेटकर नींद न आने के कारण होती है। इस उपचार में व्यक्ति को नींद की चिंता करने के बजाय जागने का प्रयत्न करने के लिए कहा जाता है।
  5. प्रकाश चिकित्सा – यदि आप बहुत जल्दी सो जाते हैं और फिर बहुत जल्दी जागते हैं, तो आप इस चक्र में संतुलन बनाने के लिए प्रकाश का उपयोग कर सकते हैं। साल में जब दिन बड़े होते हैं और शाम को बाहर रोशनी होती है, तो उस समय आप बाहर घूम  सकते हैं या आप एक प्रकाश बॉक्स का उपयोग कर सकते हैं। अपने चिकित्सक से इनके बारे में परामर्श करें।  

आपके डॉक्टर आपकी नींद और दिन में सतर्कता (alertness) को बढ़ावा देने वाली आदतों को विकसित करने में आपकी सहायता करने के लिए आपकी जीवन शैली और नींद के वातावरण से संबंधित अन्य रणनीतियों की सिफारिश कर सकते हैं। 

2. निर्धारित दवाएं (Prescription medications)

डॉक्टर द्वारा निर्धारित नींद की गोलियां आपको नींद आने में, सोये रहने में या दोनों में मदद कर सकती हैं। आमतौर पर डॉक्टर एक हफ्ते से ज़्यादा समय के लिए नींद  की गोलियों का सुझाव नहीं देते हैं, लेकिन कुछ दवाएं लम्बे समय तक ली जा सकती हैं। इनमें ज़ोपिकॉल्न (लुनेस्टा) (Eszopiclone – Lunesta), रमेल्टॉन (रोज़ेरेम) (Ramelteon – Rozerem) शामिल हैं। 

निर्धारित (Prescription) नींद की गोलियों के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जैसे कि दिन में अर्धचेतनावस्था और बेहोश होने का खतरा बढ़ना या ये हमारी आदत भी बन सकती हैं। अतः इन दवाओं और अन्य संभावित दुष्प्रभावों के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

3. मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध नींद के अन्य साधन 

गैर-निर्धारित (Nonprescription) नींद की दवाओं में एंटीहिस्टामाइन (antihistamines) होते हैं, जो आपको सुस्त कर सकते हैं, लेकिन इनका नियमित उपयोग ठीक नहीं है। इन दवाओं को लेने से पहले अपने चिकित्सक से बात करें। एंटीहिस्टामाइन के कई दुष्परिणाम हो सकते हैं, जैसे – दिन में नींद आना, चक्कर आना, भ्रम, चेतना में कमी आना और पेशाब करने में कठिनाई, जो अधेड़ व्यक्तियों में और भी गंभीर हो सकते हैं।

4. वैकल्पिक चिकित्सा (Alternative medicine)

बहुत से लोग अनिद्रा के उपचार के लिए अपने चिकित्सक के पास नहीं जाते हैं और अपने आप इस समस्या से निपटने की कोशिश करते हैं। हालाँकि, कई मामलों में सुरक्षा और प्रभाव साबित नहीं किया गया है। 
कुछ लोग निम्नलिखित उपचार करने की कोशिश करते हैं, जैसे –

  1. मेलाटोनिन (Melatonin) – मेडिकल स्टोर पर मिलने वाला यह सप्लीमेंट अनिद्रा को दूर करने का एक तरीका है। आमतौर पर कुछ हफ्तों तक मेलाटोनिन का उपयोग सुरक्षित माना जाता है, लेकिन यह साबित करने के लिए कोई ठोस प्रमाण मौजूद नहीं है कि मेलाटोनिन अनिद्रा के लिए एक प्रभावी उपचार है। इसके दीर्घकालिक उपयोग की सुरक्षा के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।   
  2. वेलेरियन (Valerian) – यह आहार सम्बन्धी पूरक (dietary supplement) नींद लाने में सहायक होता है, क्योंकि इसका एक हल्का प्रभाव होता है। हालाँकि, यह अच्छी तरह से अध्ययन नहीं किया गया है। इसका उपयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से चर्चा करें। कुछ लोग जो इसकी ज़्यादा खुराक का इस्तेमाल करते हैं या लंबे समय से उपयोग कर रहे हैं, उनके लिवर को नुकसान हो सकता है। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह नुकसान वेलेरियन के करण होता है।
  3. एक्यूपंक्चर (Acupuncture) – कुछ प्रमाण हैं कि एक्यूपंक्चर अनिद्रा से ग्रसित लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन अधिक शोध की आवश्यकता है। यदि आप अपने पारंपरिक उपचार के साथ एक्यूपंक्चर का चुनाव करते हैं, तो अपने चिकित्सक से पूछिए कि एक योग्य एक्यूपंक्चर चिकित्सक कैसे खोजें।
  4. योग – कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि योग या ताई ची (tai chi) का नियमित अभ्यास नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
  5. ध्यान (Meditation)  कई छोटे अध्ययन सुझाव देते हैं कि पारंपरिक उपचार के साथ ध्यान (मेडिटेशन) से नींद में सुधार और तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

5. हर्बल और डाइटरी स्लीप एड्स (dietary sleep aids) के बारे में सावधानी

क्योंकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration) ने निर्माताओं के लिए यह अनिवार्य नहीं किया है कि वे डाइटरी सप्लीमेंट स्लीप एड्स को बेचने से पहले उनके प्रभावशाली या सुरक्षित होने का प्रमाण दिखाएं, इसलिए किसी भी हर्बल सप्लीमेंट या अन्य ओटीसी (OTC – Over- The-Counter) उत्पादों को लेने से पहले अपने चिकित्सक से बात करें। कुछ उत्पाद हानिकारक हो सकते हैं और यदि आप कुछ दवाएं ले रहे हैं, तो इसका नुकसान हो सकता है।

अनिद्रा (नींद न आना) के जोखिम और जटिलताएं – Insomnia Risks & Complications in Hindi

अनिद्रा के जोखिम और जटिलताएं 

क्रोनिक अनिद्रा से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम जुड़े हुए हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ के अनुसार, अनिद्रा आपके मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य के प्रति जोखिम को बढ़ा सकती है।

1. चिकित्सकीय परिस्थितियों के लिए जोखिम में वृद्धि

इनमें शामिल हैं –

  1. स्ट्रोक
  2. अस्थमा के दौरे
  3. मिर्गी का दौरा 
  4. कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली
  5. दर्द के प्रति संवेदनशीलता
  6. सूजन
  7. मोटापा
  8. डायबिटीज मेलिटस
  9. उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर)
  10. हृदय रोग

2. मानसिक स्वास्थ्य विकारों के लिए जोखिम में वृद्धि

इनमें शामिल हैं –

  1. अवसाद  
  2. चिंता
  3. भ्रम और हताशा

3. दुर्घटनाओं के लिए जोखिम में वृद्धि

अनिद्रा  प्रभावित कर सकती है आपके –

  1. ऑफिस या स्कूल में किया जाने वाले कार्य 
  2. सेक्स ड्राइव
  3. स्मृति
  4. निर्णय लेने की क्षमता 

दिन में आने वाली नींद तत्काल चिंता का विषय है। ऊर्जा की कमी चिंता, अवसाद या चिड़चिड़ापन   पैदा कर सकती है। ये न सिर्फ आपके ऑफिस या स्कूल के कार्य को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि बहुत कम नींद लेना कार दुर्घटनाओं के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।

अनिद्रा (नींद न आना) में परहेज़ – What to avoid during Insomnia in Hindi?

निम्नलिखित सुझावों का उद्देश्य अस्थायी अनिद्रा से उबरने में मदद करना और रात में एक अच्छी नींद लेने की संभावना को बढ़ाना है –

  1. अपने बेडरूम को एक आकर्षक स्थान बनाएं। कमरे को व्यवस्थित रखें। सुनिश्चित करें कि आपके पास आपकी ज़रूरतों के मुताबिक सही बिस्तर और गद्दे हों। घटिया गद्दे मांसपेशियों की समस्याओं और नींद में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। 
  2. केवल सोने और सेक्स करने के लिए ही बिस्तर का उपयोग करें। टीवी देखने, खाने, काम करने या किसी भी अन्य गतिविधि के लिए बिस्तर का उपयोग करने से बचें। यदि आप रात को बिस्तर पर बैठकर पढ़ना चाहते हैं, तो केवल मनोरंजक पुस्तकें पढ़ें।
  3. चिकित्सक अक्सर अनिद्रा के लिए उपचार योजना के एक हिस्से के रूप में “रीकंडीशनिंग” का उपयोग करते हैं। इस पद्धति के साथ लोग नए तरीके से निद्रा के साथ बिस्तर को संबद्ध करते हैं। यदि आप अपने आप को सोने  में असमर्थ पाते हैं, तो बिस्तर छोड़कर दूसरे कमरे में चले जाएं, ताकि आप सिर्फ सोने के लिए बिस्तर का उपयोग करें न कि जागने के लिए।
  4. नियमित रूप से सोने और जागने का एक पैटर्न बना लें। इसके परिणामस्वरूप आपका शरीर आंतरिक रूप से भी उस पैटर्न के अनुसार अपने आपको ढाल लेगा और आपको निर्धारित समय पर सोने और जागने के संकेत देगा। यह शुरू करने का एक अच्छा तरीका है – हर रोज़ एक ही समय पर उठना, यहाँ तक ​​कि सप्ताहांत (weekends) में भी।                                                                              
  5. चाहे दिन में कितनी भी नींद आये, लेकिन झपकी न लें। दोपहर में ली जाने वाली झपकी से रात में नींद आना मुश्किल हो सकता है। सप्ताहांत (weekends) पर अतिरिक्त नींद लेना आपके नियमित निद्रा पैटर्न को बिगाड़ सकता है और मिडवीक (midweek) अनिद्रा की स्थिति को खराब कर सकता है।                            
  6. दोपहर और शाम को कैफीन के सेवन को सीमित करें। याद रखें कि चॉकलेट खाने और कोको और कोला पीने से भी शरीर में कैफीन की मात्रा बढ़ती है।              
  7. अपने शराब के सेवन का ध्यान रखें। सोने से कुछ घंटे पहले किसी भी मादक पेय पदार्थ को न पीएं। दिन में किसी भी समय शराब की अत्यधिक मात्रा नींद के पैटर्न को बाधित कर सकती है और असंतोषजनक नींद की ओर ले जा सकते है। सिगरेट धूम्रपान के कारण भी अनिद्रा रोग गंभीर हो सकता है।
  8. दिन में थोड़ा व्यायाम करने की आदत डालें, लेकिन सोने से पहले व्यायाम बिलकुल न करें।
  9. शाम को हल्का भोजन खाएं। शाम को अत्यधिक भोजन करने या बिस्तर पर जाने से ठीक पहले खाना खाने से आपकी नींद में बाधा आ सकती है।
  10. सोने जाने से पहले कुछ चीज़ों की आदत डालें। सोने से पहले अपने मन को परेशान करने वाले विचारों से मुक्त करने की कोशिश करें और आरामदायक तथा मनोरंजक गतिविधि में संलग्न हों  जैसे कि पढ़ना, संगीत सुनना या एक मनोरंजक फ़िल्म देखना।

अनिद्रा (नींद न आना) में क्या खाना चाहिए? – What to eat during Insomnia in Hindi?

अनिद्रा में  क्या खाएं?

  1. चेरी का जूस – खट्टे पेय पदार्थों में मेलाटोनिन नामक हार्मोन होता है, जो नींद पर नियंत्रण रखता है।
  2. दूध – दूध में ट्रीप्टोफन (tryptophan) नामक एक एमिनो एसिड होता है। रात को गरम दूध पीने से नींद जल्दी आ जाती है।                                 
  3. साबुत अनाज – जौ, कुट्टू में मैग्नीशियम पाया जाता है, जो मांसपेशियों को सुचारु रूप से काम करने और लोगों को शांति का एहसास दिलाने में मदद  करता है।
  4. कॉम्प्लेक्स कार्ब्स (Complex carbs) – फली और चावल, विशेष रूप से चमेली चावल (jasmine rice)  इसके उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स (glycemic index) के साथ, जिसका मतलब है कि यह धीरे-धीरे पचता है और शकरकंद नींद लाने के अद्भुत स्रोत हैं, क्योंकि इनमें पोटेशियम होता है जो मांसपेशियों को शिथिल करने में मदद करता है।                          
  5. हर्बल चाय – हर्बल चाय में एक तेज़ सुगंध होती है, लेकिन यह कुछ लोगों को जल्दी सोने में मदद करती  है। यह चाय कैफीन मुक्त होती है, जो लोगों को सोने से पहले शांत करने में मदद करती है।
  6. केले – केले नींद को बढ़ाते हैं, क्योंकि इसमें प्राकृतिक रूप से मांसपेशियों को शिथिल करने वाले मैग्नीशियम और पोटेशियम मौजूद होते हैं।