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आँखों की देखभाल | घरेलू उपाय और खान पान

हमारे शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है आँखें, लेकिन अगर आँखें एक पल के लिए भी हमसे अलग हो जाये तो ज़िन्दगी में अन्धेरा छा जायेगा। मोबाइल, टीवी और लैपटॉप के इस्तेमाल से आँखे कमजोर होने लगती है।

आँखों का व्यायाम
आँखों को एक बार ऊपर की ओर देखें एक बार नीचे की ओर देखें। एक बार दाएं तरफ और एक बार बाएं तरफ देखें। आँखों को गोलाई में घुमाएं, पहले एक दिशा और फिर दूसरी दिशा में घुमाए। इससे आँखों का व्यायाम हो जाएगा।

हरी सब्जियां व फल
आंखों के लिए विटामिन ए महत्वपूर्ण होता है, इसकी कमी से नाइट ब्लांइडनेस की शिकायत होती है। विटामिन ए की जरूरत सबसे अधिक रेटीना को होती है। हरी सब्जियों में विटामिन ए सबसे अधिक होता है। हरी सब्जियों में मौजूद केरोटिन तत्व विटामिन ए में बदल जाता है। इसलिए पालक, पुदीना, मेथी, बथुआ का सेवन करें। विटामिन सी के सेवन से आंखों की रोशनी बढती है। अमरूद, संतरे, अनानास, तरबूज और अंगूर में विटामिन ए और सी मौजूद होता है।

जिंक फूड
जिंक आंखों के लिए बहुत अच्छा होता है। जिंक, विटामिन ए के लिए रेटिना की मदद करता है। बिना जिंक के आंखों को जरूरत के अनुसार विटामिन नहीं मिला, तो परिणामस्वरूप आपकी नजरें कमजोर होने लगती है। मुंगफली, दही, डार्क चॉकलेट, तिल व कोको पाउडर आदि में जिंक भरपूर मात्रा में पाया जाता है। देखने की क्षमता उम्र भर एक सी बनी रहे। इसके लिए प्याज व लहसुन को अपने खाने में शामिल करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को मोतियाबिंद की समस्या हो तो उसे सेलेनियम से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए।

अंडा व मछली
आंखों के लिए अंडा लाभदायक होता है। कैरोटिनायड्स का निर्माण करने वाले ल्यूटिन व जीजेंथिन नामक तत्व अंडे में प्रचुरता में पाए जाते हैं। रोज एक अंडा खाने से केरोटिनाइड्स की कमी के कारण आंखों के सेल्स में होने वाला क्षरण रोका जा सकता है।आंखों के लिए अंडा लाभदायक होता है। रोज अंडा खाने से केरोटिनाइड्स की कमी के कारण आंखों के सेल्स में होने वाला क्षरण रोका जा सकता है। मछली में ओमेगा 3 भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो आंखों के लिए लाभदायक होता है।

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ऐलोवेरा के फायदे – 2

  • एलोवेरा को रक्त शोधन, पाचन क्रिया के लिए काफी गुणकारी भी माना जाता है।
  • यह इसलिए भी फायदेमंद है, क्योंकि यह केवल एक पक्ष की अवधि के दौरान ही अपना असर दिखाने में सक्षम है।
  • नियमित रूप से एलोवेरा जूस को पीने से शरीर में नयी ऊर्जा का संचार होता है।
  • एलोवेरा जूस के सेवन से त्वचा में निखार आता है।
  • इसके सेवन से आपकी त्वचा लंबे समय तक जवां लगती है।
  • इसको पीने से या बालों में लगाने से चमक आती है, रूसी दूर हो जाती है और टेक्सचर भी अच्छा हो जाता है।
  • एलोवेरा में बैक्टीरिया और फंगस से लड़ने की क्षमता होती है। ये डैंड्रफ दूर करने में काफी उपयोगी है।
  • इसके एंटी फंगल गुणों के कारण यह त्वचा पर फंगल इन्फेक्शन जल्दी ठीक भी कर देता है।
  • एलोवेरा का कोई भी अतिरिक्त प्रभाव नहीं होता। शरीर में रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाकर खून की कमी को पूरा करता है।
  • इसका नियमित उपयोग करके लंबी उम्र तक स्वस्थ रहा जा सकता है।
  • एलोवेरा जूस के नियमित इस्तेमाल से वजन बड़ी आसानी से घट जाता है।
  • आप घरेलू फेसवास बना कर भी इसका उपयोग कर सकते हैं।
  • एलोवेरा के रस में हल्दी मिलाकर सिर में लगाने से सिर दर्द में आराम पहुँचता है।
  • एलोवेरा का जूस पीने से पीलिया में भी फायदा पहुँचता है।
  • गर्भावस्था के दौरान पेट पर आने वाले स्ट्रेच मार्क्स दूर करने में एलोवेरा लाभकारी है।
  • एलोवेरा में मौजूद एंजाइम ढीली पड़ चुकी त्वचा को हटाकर नयी त्वचा को नमी से युक्त रखते है।
  • आंवला और जामुन के साथ एलोवेरा का उपयोग करने से ये आंखों का भी बचाव करता है और साथ ही साथ बालों को मजबूती मिलती है।
  • शेव करने के बाद अगर चेहरा कट जाता है, तो ऐसे में एलोवेरा का जेल ऑफ्टर शेव की तरह भी काम करता है।
  • इसका एक सनस्क्रीन की तरह इस्तेमाल हो सकता है।
  • इसके एंटी ऑक्सीडेंट नमी को बनाए रखने में मदद करते हैं।
  • इसका इस्तेमाल मोइश्चराइजर के निर्माण में किया जाता है।
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ऐलोवेरा के फायदे

हर व्यक्ति एलोवेरा के फायदे के बारे में जानता है। ये औषीय पौधा है जिसके कई फायदे हैं। हम जिन फायदों के बारे में आज आपको बताएँगे उनके बारे में कम लोगों को ही मालूम होगा। आयुर्वेद में इसे संजीवनी पोधा भी कहा जाता है। पूरे विश्व में इसकी 400 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से सिर्फ 4 प्रजातियां हीं हमें लाभ पहुंचाने में कारगर होती हैं।

एलोवेरा के फायदे :

  • इसका प्रयोग पौष्टिक आहार के रूप में होता है।
  • एक छोटे प्याले के सेवन से दिन-भर शरीर में ताकत बनी रहती है।
  • यह बवासीर रोग में आराम पहुँचाती है।
  • मधुमेह के रोगियों के लिए फ़ायदेमंद है।
  • गर्भाशय के रोगों में यह चमत्कारी है।
  • पेट से संबन्धित समस्याओं में में भी फायदेमंद है।
  • जोड़ों के दर्द में आराम पहुँचा देता है।
  • त्वचा की समस्याएँ जैसे मुंहासे, रूखी त्वचा, झुर्रियों, चेहरे के दाग, आंखों के काले घेरों, फटी एड़ियों के लिए यह लाभप्रद है।
  • यह खून की कमी को दूर करता है
  • शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
  • जलने, कटने पर, अंदरूनी चोटों पर एलोवेरा अपने एंटी बैक्टेरिया और एंटी फंगल गुण के कारण घाव को जल्दी भरता है।
  • यह रक्त में शुगर लेवेल को नियंत्रित रखता है।
  • यह मच्छर से त्वचा को सुरक्षित रखता है, इसमें प्राकृतिक रूप से मॉस्किटो रिपेलेंट गुण मौजूद होते हैं।
  • एलोवेरा का इस्तेमाल जैल, बॉडी लोशन, हेयर जैल, स्किन जैल, शैंपू, साबुन, फेशियल फोम, हेयर स्पा इत्यादि के निर्माण में भी किया जाता है।
  • एलोवेरा जेल या रस में मेहंदी में मिलाकर बालों में लगाने से बाल चमकदार व स्वस्थ होंगे।
  • एलोवेरा के रस में नारियल के तेल की थोड़ी सी मात्रा मिलाकर कोहनी, घुटने व एड़ियों पर लगाकर धोने से इन जगहों पर पड़ने वाला कालापन दूर होता है।
  • इसकी पत्तियों का सेवन करने से पेट में कब्ज की समस्या से राहत मिलती है।
  • गुलाबजल में एलोवेरा का रस मिलाकर त्वचा पर लगाने से त्वचा की नमी लौटती है।
  • एलोवेरा के गूदे में मुलतानी मिट्टी या चंदन पावडर मिलाकर लगाने से त्वचा के कील-मुंहासे आदि लंबे समय के लिए मिट जाते हैं।
  • यह पौधा कम पानी और कम उर्वरक मिट्टी में भी आसानी से पनप सकता है, इसलिए आप इसे बड़ी आसानी से ही अपने घर में छोटे गमलों में लगा सकते हैं।
  • यह जलने कटने के घावों पर मरहम की तरह काम करने के साथ साथ उनके निशानों पर भी काम करता है।

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Benefits of Dates

Dates are delicious and full of nutritious. It grow on the date palm tree.

They’re widely consumed around the world and hold high value in many cultures.

Dates are having high fiber and sugar content.

Dates Nutrition Information

Dates are highly nutritious. Though fresh dates are edible, dates are most often consumed dried and easily identified by their dry skin.

A 100 gm serving of dates provides:

  • Calories: 282
  • Protein: 2.5 grams
  • Carbs: 75 grams
  • Fiber: 8 grams
  • Sugar: 64 grams
  • Calcium: 3% of the Daily Value (DV)
  • Iron: 6% of the DV
  • Potassium: 14% of the DV
  • Magnesium: 10% of the DV
  • Copper: 23% of the DV
  • Selenium: 6% of the DV
  • Vitamin B6: 10% of the DV
  • Folate: 6% of the DV

Dates are typically dried and small. This makes eating multiple dates very doable. It’s easy to eat large quantities of calories, fiber, and natural sugar in one sitting. Therefore, be sure to eat dates in moderation.

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Treating Cold – Home Remedy

Chicken soup is a great choice when you’re sick with cold. Chicken soup with vegetables, prepared from scratch or warmed from a can, can give you relief from cold. The study found that chicken soup was effective for reducing the symptoms of cold. It also carries great nutritional value and helps keep you hydrated. It’s a good choice, no matter how you’re feeling.

Ginger has many health benefits, We have scientific proof of its curative properties. A few slices of raw ginger root in boiling water will reduce your cold. Research suggests that it can also ward off the feelings of nausea.

Honey has antibacterial and antimicrobial properties. Honey in tea with lemon can give relief in sore throat pain. Honey is an effective cough suppressant. Giving children 10 grams of honey at bedtime reduced the severity of their cough. The children reportedly slept more , which also helps reduce cold and its symptoms.

We should never give honey to a child younger than 1 year old. While they’re usually harmless to older children and adults.

Garlic contains the allicin, which have antimicrobial properties. Adding a garlic supplement to your diet reduce the severity of cold symptoms. It might even help you avoid getting sick in the first place.

Adding more garlic to your diet probably won’t hurt.

Vitamin C plays an important role and has many health benefits. Along with limes, oranges, grapefruits, leafy greens, and other fruits and vegetables, lemons are a good source of vitamin C. Fresh lemon juice to hot tea with honey may reduce cold symptoms. Drinking hot or cold lemonade may also help.

These drinks may not clear up your cold entirely, they can help you get the vitamin C that your immune system needs.

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केले के फूल का घरेलू और आयुर्वेदिक उपयोग

जैसा की हम सब जानते हैं की केले के पेड़ का हमारे जिंदगी में कितना महत्व है. हम केले का फल का कच्चे और पक्के रूप में उपयोग करते हैं। केले में बहुत सारी खूबियां होती हैं जिसकी वजह से हर उम्र के लोगो के लिए फायदेमंद है। आज हम आपको केले का एक नया उपयोग बताएँगे।

कई बार खेलते समय बच्चो और बड़ो को चोट लग जाया करती है। ज्यादातर बच्चो को खेलते समय कई बार अंदुरनी चोट लग जाती है। इसमें से सबसे दर्दनाक होता है अंडकोष पर चोट लगना जोकि ज्यादातर क्रिकेट या बॉल से जुड़े हुए खेल में होता है। कई बार चोट लगी जगह पर सूजन आ जाती है और बच्चे घर में ये बात नहीं बताते. बड़े भी कई बार इस तरह के चोट को नार्मल लेते है और कोई इलाज नहीं करते। ऐसे समय में इस घरेलु और आयुर्वेदिक उपचार का प्रयोग कर सकते हैं। इस प्रयोग का कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं है और आपको बहुत जल्दी फायदा होता है। इसमें केले के फूल का प्रयोग किया जाता है। केले का फूल आपको बहुत आसानी से मिल जायेगा. आपके आस पास जहाँ भी लगा हो उसमे से केले के फूल का एक परत निकल कर ले आइये।

उपयोग में लाने का तरीका
1. पहले केले के फूल की एक परत लें
2. उसके बाद उसे धीमी आंच पर हल्का सेक लें
3. ध्यान रखें की सेंकते समय जैसे ही फूल की परत में नमी आ जाएं उसे हटा लें
फिर उस पर हल्का गुनगुना देसी घी लगा लें
4. अब इस फूल को चोट वाली जगह पर लगाकर बांध लें
5. 3-4 घंटे में आपकी चोट पर सूजन बिलकुल कम हो जायेगा
6. जरुरत पड़े तो एक और फूल की परत का प्रयोग दुबारा करें

ज्यादातर समय ये एक बार में ही ठीक कर देता है।
नोट: ध्यान रहे की खुली चोट पर इसे प्रयोग न करें

और किसी जानकारी के लिए आप संपर्क कर सकते हैं।

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तुलसी के फायदे (Benefits of Tulsi)

तुलसी एकऔषधि है, जिसका इस्तेमाल कई बीमारियों में किया जाता है. सर्दी-खांसी से लेकर कई बड़ी बीमारियों में भी एक कारगर औषधि है.
ज्यादातर परिवारों में तुलसी की पूजा की जाती है. इसे सुख और कल्याण के तौर पर देखा जाता है लेकिन पौराणिक महत्व से अलग तुलसी एक जानी-मानी औषधि है, जिसका इस्तेमाल कई बीमारियों में किया जाता है. सर्दी-खांसी से लेकर कई बड़ी बीमारियों में भी एक कारगर औषधि है.

तुलसी के पौधे के हर भाग को स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद बताया गया है. तुलसी की जड़, उसकी शाखाएं, पत्ती और बीज सभी का अपना महत्व है. आमतौर पर घरों में दो तरह की तुलसी देखने को मिलती है. एक जिसकी पत्त‍ियों का रंग थोड़ा गहरा होता है औ दूसरा जिसकी पत्तियों का रंग हल्का होता है.

तुलसी के कुछ अनदेखे फायदे इस प्रकार हैं:

1. यौन रोगों के इलाज
पुरुषों में शारीरिक कमजोरी होने पर तुलसी के बीज का इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है. यौन-दुर्बलता और नपुंसकता में भी इसके बीज का नियमित इस्तेमाल फायदेमंद रहता है.

2. पीरियड्स की समस्या
अक्सर महिलाओं को पीरियड्स में अनियमितता की शिकायत हो जाती है. ऐसे में तुलसी के बीज का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है. मासिक की अनियमितता को दूर करने के लिए तुलसी के पत्तों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

3. सर्दी में खास
अगर आपको सर्दी या फिर हल्का बुखार है तो मिश्री, काली मिर्च और तुलसी के पत्ते को पानी में अच्छी तरह से मिलकर इस्तेमाल करने से फायदा होता है.

4. दस्त होने पर
अगर आप दस्त से परेशान हैं तो तुलसी के पत्तों का इलाज फायदा देगा. तुलसी के पत्तों को जीरे के साथ मिलाकर उसे दिन में 3-4 बार चाटते रहें. ऐसा करने से दस्त रुक जाती है.

5. सांस की दुर्गंध दूर करने के लिए
सांस की दु्र्गंध को दूर करने में भी तुलसी के पत्ते फायदेमंद होते हैं और नेचुरल होने की वजह से इसका साइडइफेक्ट भी नहीं होता है. अगर आपके मुंह से बदबू आ रही हो तो तुलसी के पत्तों को चबा लें. ऐसा करने से दुर्गंध चली जाती है.

6. चोट लग जाने पर
अगर आपको कहीं चोट लग गई हो तो तुलसी के पत्ते को फिटकरी के साथ मिलाकर लगाने से घाव ठीक हो जाता है. तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो घाव को पकने नहीं देता है. इसके अलावा तुलसी के पत्ते को तेल में मिलाकर लगाने से जलन कम होती है.

7. चेहरे की चमक के लिए
त्वचा संबंधी रोगों में तुलसी खासकर फायदेमंद है. इसके इस्तेमाल से चेहरा साफ होता है.

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अच्छी गहरी नींद के घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय – Home Remedies for Insomnia

नींद, महर्षि आयुर्वेद के मौलिक आधार और स्तंभों में से एक है। नींद इंसान के शरीर को स्वस्थ और संतुलित बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। एक अच्छी और गहरी नींद तनाव से राहत देने के साथ साथ जीवन शक्ति को बनाए रखने में भी मदद करती है। जब एक इंसान अच्छी और गहरी नींद लेता है तो उस समय उसका शरीर ऊतकों (tissues) को फिर से जीवंत करता है। उचित नींद इंसान के शरीर एवं मस्तिष्क दोनों को आराम देने के लिए काफी आवश्यक है। लेकिन नींद न आना यानी अनिद्रा आजकल के समय में एक आम समस्या बन चुकी है। तो चलिए जानते हैं नींद न आने के घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय के बारे में जिसके उपयोग से आप एक अच्छी और गहरी नींद का आनंद ले सकते हैं।

अच्छी नींद का आयुर्वेदिक उपाय है कैफीन और चीनी से बचाव – Avoid sugar and caffeine for sound sleep in Hindi

कैफीन और चीनी नींद को ख़त्म कर देती हैं, इसलिए दोपहर के 3 बजे के बाद इन चीज़ो को खाने से बचना चाहिए।

अनिद्रा का आयुर्वेदिक इलाज है गर्म दूध के साथ जायफल – Hot milk good for sleep in Hindi

दूध प्रोटीन ट्रिपटोफन(tryptophan) का एक बड़ा स्रोत है, जो शरीर में नींद लाता है। एक अच्छी नींद के लिए गर्म दूध के एक गिलास के साथ जायफल का एक चौथाई चम्मच मिलाकर पिएं। अगर आपके शरीर का प्रकार पित्त है, तो आप दूध में शतावरी मिला सकते हैं। कफ शरीर के प्रकार वाले लोग हल्दी मिला सकते हैं और वात शरीर के प्रकार वाले लोग दूध में लहसुन मिला सकते हैं। 

नींद न आने का आयुर्वेदिक उपाय है तेल की मालिश – Oil massage for good sleep in Hindi

तेल मालिश तंत्रिका तंत्र को शांत करने का एक बढ़िया तरीका है जिससे नींद अच्छी आती है। सिर और पैर पर भ्रिंगराज तेल से मालिश अच्छी नींद लाने में मदद करता है।

अच्छी गहरी नींद लाने के लिए करें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बंद – Turn off electronic gadgets before bed in Hindi

सोने के कम से कम एक घंटे पहले सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बंद कर दें जैसे मोबाइल, लैपटॉप, टीवी आदि। इससे तंत्रिका तंत्र को शांत करने में मदद मिलेगी और आप आराम से सो पाएँगे।

नींद लाने का उपाय है ध्यान – Practice meditation before sleep in Hindi

ध्यान (meditation) के स्वास्थ्य लाभ हमेशा से विशाल रहे हैं। इसलिए यह आपके शरीर के समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए अच्छा है। बिस्तर पर जाने से पहले 10-15 मिनट के लिए ध्यान ज़रूर लगाएँ। यह आपके शरीर को आराम देगा और एक गहरी नींद के लिए प्रेरित करेगा।

अच्छी नींद आने के लिए करना चाहिए योग – Yoga for sleep disorders in Hindi

योग, विशेष रूप से प्राणायाम का अभ्यास, आपको शांत रखने, शरीर को आराम देने और तंत्रिका तंत्र के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। सरल साँस लेने के व्यायाम भी नींद उत्प्रेरण में मदद करते हैं।

अच्छी नींद का आयुर्वेदिक उपाय है स्वस्थ आहार – Healthy diet for sleep in Hindi

एक स्वस्थ आहार अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। भारी मसालेदार या उत्तेजक खाद्य पदार्थों से बचें क्योंकि वे अम्लता या अपच भोजन करने का सुझाव दिया जा पैदा कर सक ते हैं, जो नींद चक्र को प्रभावित कर सकते हैं। एक उचित पाचन और अच्छी नींद के लिए बिस्तर पर जाने से दो से तीन घंटे पहले एक हल्का ता है। 

गहरी नींद की आयुर्वेदिक दवा है जड़ी बूटियों का सेवन – Herbs for sleep disorders in Hindi

अच्छी नींद के लिए कुछ आयुर्वेदिक जड़ी बूटियाँ मौजूद हैं। कुछ जड़ी बूटियाँ जैसे अश्वगंधा, तगार, और शंखपुष्पी आदि आपकी तंत्रिकाओं को आराम देती हैं जिससे आपको अच्छी नींद आती है।

नींद लाने का तरीका है नियमित दिनचर्या का पालन – Proper routine good for sleep in Hindi

एक नियमित दिनचर्या का पालन करना और समय पर सोना आपको अच्छी नींद देता है।

अच्छी नींद के लिए इन आयुर्वेदिक सुझावों का नियमित रूप से पालन करने पर, आपको निश्चित रूप से मदद मिलेगी। इन के साथ, यह भी सुनिश्चित करें कि कमरे में सोते समय काफी अंधेरा होना चाहिए।

नींद न आने की समस्या को करें दूर सेब के सिरके से – Apple cider vinegar for insomnia in Hindi

सेब साइडर सिरका में अमीनो एसिड होता है जो थकान को राहत देता है। साथ ही, यह फैटी एसिड को तोड़ने में मदद करता है। शहद भी आपके इंसुलिन को बढ़ाकर नींद को बढ़ावा देता है। शहद के इस्तेमाल से आपके दिमाग के केमिकल आपके नींद और उठने के चक्र को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। 

दिलचस्प बात यह है कि सेरोटोनिन का अगर स्तर नीचे जाता है तो आपके नींद में रुकावटे पैदा होने लगती हैं और अगर ज़्यादा मात्रा में रहे तो आपको नींद आना मुश्किल हो जाता है। इसलिए आपको उपाए के गुणों के हिसाब से उनका सेवन करना है जिस वजह से आपको सेरोटोनिन से जुडी उच्च या निम्न स्तर की परेशानी न झेलनी पड़े।

सेब साइडर सिरका का कैसे करें इस्तेमाल –

  • दो चम्मच सेब का सिरका और शहद को एक ग्लास गर्म पानी में ज़रूर मिलाएं। अब इस मिश्रण को सोने से पहले जरूर पियें।
  • इसके अलावा आप एक कप शहद में दो चम्मच सेब का सिरका मिला लें। अब इस मिश्रण का एक चम्मच पानी के साथ या बिन पानी के भी ले सकते हैं।
  • बच्चों के लिए आप दो चम्मच शहद को पानी में डालकर भी दे सकते हैं।

इसके अलावा पर्याप्त नींद लेने का प्रयास करें। किसी शांत और अँधेरे वाले कमरे में सोएं, सोने से पहले अधिक और भारी खाने को नज़रअंदाज़ करें, आराम की तकनीकों का अभ्यास करें, कैफीन को अपने आहार से दूर कर दें और रोज़ाना व्यायाम करने की कोशिश करें। अगर नींद की कमी आपकी दैनिक गतिविधियों को प्रभावित कर रही है तो अपने डॉक्टर को इस बारे में जानकारी दें।

अनिद्रा का घरेलू उपचार है वेलेरियन के जड़ – Valerian root for insomnia in Hindi

वेलेरियन एक औषधीय जड़ी बूटी है और इसमें मांसपेशियों को आराम देने के गुण भी मौजूद होते हैं। इसके सेवन से शरीर को आराम मिलता है और गहरी नींद को भी बढ़ावा मिलता है।

वेलेरियन जड़ का कैसे करें इस्तेमाल –

  • दो कप गर्म पानी में एक या आधा चम्मच वेलेरियन जड़ और जायफल को मिलाएं। अब इस 15 मिनट के लिए उबलते रहने दें। 15 मिनट के बाद मिश्रण को छान लें और पी लें। इस मिश्रण का इस्तेमाल रोज़ाना न करें क्योंकि इससे आपको हृदय की समस्या हो सकती है।
  • सिर्फ वेलेरियन जड़ की चाय को पीने से भी अपनी अनिंद्रा की समस्या दूर हो सकती है।
  • इसके अलावा आप आधा चम्मच वेलेरियन को पानी में मिलाकर पी सकते हैं। आप इस मिश्रण का सेवन पूरे दिन में तीन बार ज़रूर करें।

अच्छी नींद लाने के उपाय में करें मेथी का जूस का उपयोग – Fenugreek juice for insomnia in Hindi

मेथी चिंता, अनिद्रा, और चक्कर आने की समस्या को दूर करती है।

मेथी का जूस का कैसे करें इस्तेमाल –

  • दो चम्मच मेथी के पत्तों का जूस और एक चम्मच शहद को अच्छी तरह से मिला लें।
  • अब इस मिश्रण का सेवन रोज़ाना करें।

गहरी नींद का आसान उपाय है गर्म पानी – Warm milk for insomnia in Hindi

गर्म दूध आपके दिमाग और शरीर को आराम देने में बेहद लाभकारी है। केले की तरह ही दूध में भी ट्रिपटोपॉन होता है जो नींद को बढ़ावा देने में मदद करता है।

गर्म दूध का कैसे करें इस्तेमाल –

  • एक कप में गर्म दूध में एक या आधा चम्मच दालचीनी पाउडर को मिलाएं।
  • सोने से पहले इस मिश्रण को पी लें।

अनिंद्रा को दूर करने का घरेलू उपाय है केला – Banana good for insomnia in Hindi

एक केला आपकी अनिंद्रा की समस्या के लिए बहुत प्रभावी हो सकता है। क्योंकि इसमें ट्रिपटोपॉन नामक एक एमिनो एसिड होता है जो सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। केले के सेवन से आपकी मनोदशा बढ़ती है और आपकी भूख को भी नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। केले में मौजूद खनिज जैसे आयरन, कैल्शियम और पोटेशियम अच्छी नींद देने में सहायक होते हैं।

अनिंद्रा की समस्या के लिए घरेलू नुस्खा है कैमोमाइल – Chamomile tea for insomnia in Hindi

यह लम्बे समय से नींद के लिए बहुत फायदेमंद है। कैमोमाइल चाय अनिद्रा के लिए एक प्रसिद्ध प्राकृतिक घरेलू उपाय है। हालांकि सटीक कारण अभी पता नहीं चल पाया है लेकिन अध्ययनों के अनुसार कैमोमाइल में एपिजेनिन नामक यौगिक पाया जाता है जो अनिंद्रा के लिए बेहद प्रभावी होता है।

अच्छी नींद और थकान दूर करने के लिए एक कप कैमोमाइल चाय का आनंद लें। कैमोमाइल चाय में दालचीनी की एक चुटकी और कुछ शहद की मात्रा भी मिला सकते हैं।

अनिंद्रा को दूर करने के लिए करें जायफल का इस्तेमाल – Nutmeg powder for insomnia in Hindi

जायफल में बहुत ही प्रभावी गुण पाए जाते हैं। इसके इस्तेमाल से आपकी अनिंद्रा की समस्या खत्म होती है।

जायफल का कैसे करें इस्तेमाल –

  • एक कप गर्म दूध में एक से आठ चम्मच जायफल पाउडर को मिलाएं।
  • अब इस मिश्रण को सोने से पहले पियें।
  • इसके अलावा आप किसी भी फलों के जूस में ताज़ी जायफल को मिला सकते हैं। अब इस मिश्रण का सेवन सोने से पहले करें।
  • आप एक और विकल्प अपना सकते हैं। सबसे पहले एक चम्मच आंवला के जूस में कुछ मात्रा में जायफल पाउडर डालें। अब इस मिश्रण को पूरे दिन में तीन बार ज़रूर पियें। अनिंद्रा के अलावा यह अपच और अवसाद का भी इलाज करता है।

अनिद्रा के घरेलू उपाय करें जीरा से – Cumin seeds for insomnia in Hindi

जीरा औषधीय गुणों के साथ आपके पाचन क्रिया को स्वस्थ रखने में मदद करता है। पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसका उपयोग नींद को प्रेरित करने के लिए किया गया है। जीरा तेल में कई प्रभाव देखे जाते हैं।

जीरा का कैसे करें इस्तेमाल –

  • एक क्रश केले में एक चम्मच जीरे पाउडर को मिलाये और सोने से पहले इस मिश्रण को खा लें। आपके पास जीरे का पाउडर नहीं है तो आप जीरे को भूनकर और फिर उसे पीसकर इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • इसके अलावा तनाव और थकान को दूर करने के लिए आप जीरे की चाय भी बना सकते हैं। जीरे की चाय तैयार करने के लिए एक चम्मच जीरे के बीज को पांच सेकेंड के लिए हल्की आंच पर गर्म कर लें। अब जीरे को अलग रख दें। फिर एक कप पानी को गर्म करें और उसमे भुने हुए जीरे के बीज को मिक्स कर दें। अब गैस को बंद कर दें और ढक्कन से बर्तन को पांच मिनट के लिए कवर करके रखें। अंत में, सोने से पहले इस जी रा चाय को छान लें और फिर सोने से पहले पी जाएँ।

अच्छी नींद के लिए घरेलू नुस्खे में करें केसर का उपयोग – Saffron for insomnia in Hindi

केसर में कई तरह के गुण होते हैं जो अनिद्रा के इलाज में मदद करते हैं।

केसर का कैसे करें इस्तेमाल –

  • दो चुटकी केसर को एक कप गर्म दूध में मिलाएं।
  • अब इस मिश्रण का सेवन रात को सोने से पहले करें।

नींद न आने का घरेलू उपचार है गर्म पानी से स्नान – Hot bath for insomnia in Hindi

आप सोने से दो घंटे पहले गर्म पानी से नहा सकते हैं। इससे आपकी अनिंद्रा की समस्या कम होगी। इससे आपके शरीर को आराम मिलेगा और तंत्रिका अंत को शांत करने में मदद मिलेगी।

इस उपाय को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नींबू बाम, कैमोमाइल, रोजमेरी या लैवेंडर तेल की कुछ बूंदों को पानी में डालकर नहाएं।

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अनिद्रा (नींद न आना) – Insomnia in Hindi

अनिद्रा (नींद न आना) क्या है?

अनिद्रा एक नींद से सम्बन्धित समस्या है, जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है। संक्षेप में, अनिद्रा से पीड़ित व्यक्तियों के लिए नींद आना या सोते रहना मुश्किल होता है। अनिद्रा के प्रभाव बहुत भयंकर हो सकते हैं। 

अनिद्रा आमतौर पर दिन के समय नींद, सुस्ती, और मानसिक व शारीरिक रूप से बीमार होने की सामान्य अनुभूति को बढाती है। मनोस्थिति में होने वाले बदलाव (मूड स्विंग्स), चिड़चिड़ापन और चिंता इसके सामान्य लक्षणों से जुड़े हुए हैं। 

अनिद्रा में नींद से जुड़े विकारों की एक विस्तृत श्रृंखला है, जिसमें अच्छी नींद के अभाव से लेकर नींद की अवधि में कमी से जुडी समस्याएं हैं। अनिद्रा को आमतौर पर तीन प्रकारों में विभाजित किया जाता है –

  1. अस्थायी अनिद्रा – यह तब होती है, जब लक्षण तीन रातों तक रहते हैं।
  2. एक्यूट अनिद्रा –  इसे अल्पकालिक अनिद्रा भी कहा जाता है। लक्षण कई हफ्तों तक जारी रहते हैं।
  3. क्रोनिक अनिद्रा – यह आमतौर पर महीनों और कभी-कभी सालों तक रहती है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, क्रोनिक अनिद्रा के ज़्यादातर मामले किसी अन्य प्राथमिक (primary) समस्या से उत्पन्न दुष्प्रभाव होते हैं।

अनिद्रा रोग किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। यह वयस्क पुरुषों की तुलना में वयस्क महिलाओं में अधिक आम है। नींद विकार स्कूल और काम के प्रदर्शन को कमजोर कर सकता है। साथ ही, यह मोटापे, चिंता, अवसाद, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की समस्याओं, याददाश्त से जुडी समस्याओं, प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) की कार्यक्षमता को कमज़ोर और प्रतिक्रिया समय (reaction time) को कम करने का कारण बनता है।

अनिद्रा रोग दीर्घकालिक बीमारियों के होने के जोखिम को बढ़ाता है। अमेरिका की राष्ट्रीय निद्रा फाउंडेशन (National Sleep Foundation) के मुताबिक 30-40 प्रतिशत अमेरिकी वयस्कों का कहना  है कि उनमें पिछले 12 महीनों में अनिद्रा के लक्षण उत्पन्न हुए हैं और 10-15 प्रतिशत वयस्कों का दावा है कि उन्हें क्रोनिक अनिद्रा है।

अनिद्रा के कारणों में  मनोवैज्ञानिक कारक, दवाएं और हार्मोन का स्तर शामिल है।

अनिद्रा का उपचार चिकित्सकीय या व्यावहारिक हो सकता है।

अनिद्रा से ग्रसित लोगों में काम पर ध्यान केंद्रित करने और एकाग्रता से जुडी समस्याएं सामान्य हैं। अमेरिका की राष्ट्रीय हृदय, फेफड़े और रक्त संस्थान (National Heart, Lung and Blood Institute) के अनुसार, 20 प्रतिशत गैर-अल्कोहल से संबंधित कार दुर्घटनाएं ड्राइवर द्वारा झपकी लेने के कारण होती हैं।

लघु जीवन प्रत्याशा (Shortened life expectancy)

अनिद्रा के कारण आपकी जीवन प्रत्याशा कम हो सकती है। 16 अध्ययनों के एक विश्लेषण में 10 लाख से अधिक प्रतिभागियों और 112,566 मौतों के अंतर्गत नींद की अवधि और मृत्यु दर के बीच के संबंध को जाँचा गया। उसमें पाया कि जो लोग हर रात सात से आठ घंटे सोते थे, उनकी तुलना में कम सोने वाले व्यक्तियों में मृत्यु का खतरा 12 प्रतिशत ज़्यादा था।

हाल ही में हुए एक अध्ययन में 38 सालों से सतत अनिद्रा और मृत्यु दर के प्रभावों को जाँचा गया। उसमें पाया कि सतत अनिद्रा से ग्रसित लोगों की मौत का जोखिम 97% अधिक था।

अनिद्रा (नींद न आना) के प्रकार – Types of Insomnia in Hindi

अनिद्रा के प्रकार – होने के कारण के आधार पर

अनिद्रा को उसके होने के कारण आधार पर तीन प्रकार में वर्गीकृत किया जाता है – प्राथमिक अनिद्रा (Primary insomnia), माध्यमिक अनिद्रा (Secondary insomnia),अस्थायी या क्षणिक अनिद्रा (Transient insomnia)

1. प्राथमिक अनिद्रा –

प्राथमिक अनिद्रा में व्यक्ति को नींद की समस्याएं होती हैं, जो किसी भी अन्य स्वास्थ्य समस्या से प्रत्यक्ष रूप से नहीं जुडी होती हैं।

2. माध्यमिक अनिद्रा – 

माध्यमिक अनिद्रा का अर्थ है कि व्यक्ति को होने वाली नींद की समस्याएं किसी अन्य कारण की वजह से होती हैं, जैसे कि स्वास्थ्य समस्या (अस्थमा, अवसाद, गठिया, कैंसर, या सीने में जलन), दर्द; उसके द्वारा ली जाने वाली दवाएं या उसके द्वारा शराब जैसे पदार्थ का सेवन करना।

3. क्षणिक या अस्थायी  अनिद्रा –

यह तब होती है, जब लक्षण तीन रातों तक रहते हैं।

अनिद्रा रोग के प्रकार – अवधि के आधार पर

अनिद्रा की अवधि भी भिन्न होती हैं। अवधि के आधार पर अनिद्रा के दो प्रकार हैं – एक्यूट अनिद्रा (अल्पकालिक), क्रोनिक अनिद्रा (दीर्घकालिक)।

1. एक्यूट अनिद्रा –

यह अल्पकालिक हो सकती है। तीव्र अनिद्रा एक रात से लेकर कुछ हफ्तों तक रह सकती है।

2. क्रोनिक अनिद्रा – 

यह एक लंबे समय के लिए रह सकती है। जब व्यक्ति को एक महीने या उससे अधिक समय तक एक सप्ताह में कम से कम तीन रातों तक अनिद्रा होती है, तो उसे ‘दीर्घकालिक अनिद्रा’ कहा जाता है। 

अनिद्रा (नींद न आना) के लक्षण – Insomnia Symptoms in Hindi

अनिद्रा के लक्षण क्या होते हैं?

चिकित्सक अनिद्रा के साथ कई अन्य संकेतों और लक्षणों को भी जोड़ देते हैं। अक्सर ये लक्षण अन्य चिकित्सकीय या मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों में उलझन पैदा कर सकते हैं।

1. अनिद्रा से ग्रसित कुछ लोग अक्सर रात में नींद न आने और पूरी रात जागने की शिकायत कर सकते हैं। समस्या तनाव से शुरू हो सकती है। जब आपकी नींद न आने की अक्षमता बिस्तर के साथ जुड़ना शुरू हो जाती है, तब ये समस्या गंभीर हो सकती है।

2. ज़्यादातर दिन में दिखाई देने वाले लक्षण लोगों को चिकित्सकीय देखभाल के लिए प्रेरित कर सकते हैं। अनिद्रा के कारण दिन में होने वाली समस्याओं में निम्नलिखित शामिल हैं –

  1. हीन एकाग्रता और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता।  
  2. याददाश्त कमज़ोर होना।  
  3. कुसमायोजित (uncoordinated) हो जाना।  
  4. चिड़चिड़ापन
  5. सामाजिक रूप से मिलना-जुलना बंद कर देना। 
  6. थके होने और पर्याप्त नींद न लेने के कारण होने वाली मोटर वाहन दुर्घटनाएं। 

3. दिन में दिखाई देने वाले इन लक्षणों का इलाज स्वयं करने के प्रयासों द्वारा लोग इन लक्षणों को बदतर बना सकते हैं। इन प्रयासों में शामिल हैं – 

  1. शराब पीना या एंटीथिस्टामाइन (antihistamines) लेना नींद न आने की समस्याओं को और बदतर कर सकता है।
  2. कुछ अन्य लोग बिना डॉक्टर से परामर्श किये नींद की गोलियाँ लेने की कोशिश करते हैं।

नींद न आने (अनिद्रा) के कारण – Insomnia Causes in Hindi

अनिद्रा के कारण क्या होते हैं? 

अनिद्रा प्राथमिक समस्या हो सकती है या अन्य स्थितियों से जुडी हो सकती है। अनिद्रा आमतौर पर तनाव, जीवन की घटनाओं या आदतों का परिणाम होती है, जिससे नींद में बाधा आती है। मुख्य कारणों का इलाज करने से अनिद्रा का समाधान हो सकता है, लेकिन कभी-कभी इसमें कई साल लग जाते हैं। 

क्रोनिक अनिद्रा के सामान्य कारणों में शामिल हैं –

  1. तनाव – ऑफिस, स्कूल, स्वास्थ्य, आर्थिक या परिवार से जुडी हुई समस्याएं रात में आपके मस्तिष्क को सक्रिय रख सकती हैं, जिसके कारण सोना मुश्किल हो जाता है। तनावपूर्ण जीवन की घटनाएं या मानसिक परेशानी, जैसे आपके किसी करीबी व्यक्ति की मृत्यु या बीमारी, तलाक या नौकरी छूट जाना–  के कारण अनिद्रा हो सकती है।  
  2. यात्रा या काम की समय-सारणी (schedule) – आपकीसिरकेडियन रिदम (circadian rhythm) एक आंतरिक घड़ी के रूप में कार्य करता है, जो आपके सोने-जागने के चक्र, चयापचय और शरीर के तापमान का मार्गदर्शन करती है। आपके शरीर के सिरकेडियन रिदम के बिगड़ने से अनिद्रा हो सकती है। इसके कारणों में विभिन्न समय क्षेत्रों (time zones) में हवाई यात्रा करना, जल्दी या देर वाली पारी (शिफ्ट) में काम करना या पारी (शिफ्ट) का बार-बार बदलना शामिल हैं।
  3. सोने की ख़राब आदतें – सोने की ख़राब आदतों में सोने का अनियमित समय, दिन में सोना, सोने से पहले उत्तेजक गतिविधियों, सोने के लिए उचित वातावरण का अभाव और अपने बिस्तर पर बैठकर खाना या टीवी देखना शामिल हैं। सोने से पहले कंप्यूटर, टीवी, वीडियो गेम, स्मार्टफ़ोन या अन्य स्क्रीन आपके नींद के चक्र में हस्तक्षेप कर सकते हैं।
  4. शाम को अधिक मात्रा में भोजन करना – सोने के समय से पहले हल्का भोजन करना ठीक है, लेकिन बहुत अधिक खाने से आपको सोते समय शारीरिक रूप से असहज महसूस हो सकता है। बहुत से लोग सीने में दर्द का अनुभव करते हैं। एसिड और भोजन का बैकफ्लो पेट से भोजन नलिका (esophagus) की ओर होने लगता है, जिसके कारण आप जागते रह सकते हैं।

क्रोनिक अनिद्रा भी चिकित्सकीय परिस्थितियों या कुछ दवाओं के उपयोग के साथ संबंधित हो सकती है। चिकित्सकीय परिस्थितियों का इलाज करने से नींद में सुधार हो सकता है, लेकिन चिकित्सा की स्थिति में सुधार के बाद अनिद्रा जारी रह सकती है।

अनिद्रा के अतिरिक्त सामान्य कारणों में शामिल हैं –

  1. मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकार – चिंता संबंधी विकार, जैसे कि पोस्ट-ट्रॉमैटिक तनाव विकार आपकी नींद को बाधित कर सकते हैं। बहुत जल्दी जाग जाना अवसाद का संकेत हो सकता है। अनिद्रा अक्सर अन्य मानसिक स्वास्थ्य विकारों के साथ भी होती है।
  2. दवाएं कई निर्धारित (prescription) दवाएं नींद में हस्तक्षेप कर सकती हैं, जैसे कि अस्थमा के लिए दवा, हाई बीपी के लिए दवा, या एंटीडिप्रेसेंट दवाएं। कई ओवर-द-काउंटर दवाएं (बिना प्रिस्क्रिप्शन के मिलनी वाली दवाएं , जैसे कि कुछ दर्द की दवाएं, एलर्जी और जुकाम की दवा तथा वजन घटाने के उत्पादो में – कैफीन और अन्य उत्तेजक होते हैं, जो नींद को बाधित कर सकते हैं।
  3. चिकित्सकीय परिस्थितियाँ – अनिद्रा से जुड़ी स्थितियों के उदाहरणों में क्रोनिक दर्द, कैंसर, शुगर (डायबिटीज), हृदय रोग, अस्थमा, गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी; GERD), अतिसक्रिय थायरॉयड, पार्किंसंस रोग और अल्जाइमर रोग शामिल हैं। 
  4. नींद से संबंधित विकार स्लीप एपनिया आपको रात में समय-समय पर सांस लेने से रोकता है, जिसके कारण आप सो नहीं पाते। रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम आपके पैरों में अजीब सी सनसनी पैदा करता है और न चाहते हुए भी आपको आपको अपने पैर बार-बार हिलाने के लिए विवश होना पड़ता है। ऐसी स्थिति में आप सो नहीं पाते हैं।
  5. कैफीन, निकोटीन और शराब – कॉफी, चाय, कोला और अन्य कैफीन युक्त पेय उत्तेजक होते हैं। दोपहर के बाद या शाम को इन्हें पीने से आपकी नींद बाधित होती है। तंबाकू उत्पादों में निकोटीन एक और उत्तेजक है, जो नींद में हस्तक्षेप कर सकता है। शराब आपको सोने में मदद कर सकती है, लेकिन यह गहरी नींद को रोकती है और अक्सर आप आधी रात में जाग जाते हैं।  

नींद न आने (अनिद्रा) से बचाव – Prevention of Insomnia in Hindi

अनिद्रा की रोकथाम

सोने की अच्छी आदतें अनिद्रा को रोकने और गहरी नींद सोने में मदद कर सकती हैं –

  1. सप्ताहांत के साथ-साथ अपने हर दिन के सोने और जागने के समय को एक जैसा रखें।
  2. सक्रिय रहें। नियमित की गयी गतिविधियाँ रात में अच्छी नींद के लिए महत्वपूर्ण होती हैं।
  3. अपनी दवाओं की जाँच करें और देखें कि क्या उनकी वजह से ही आपको अनिद्रा की बीमारी हुई है या नहीं।
  4. अल्पनिद्रा या झपकी लेने से बचें। 
  5. कॉफ़ी और अल्कोहल से बचें या सीमित मात्रा में सेवन करें। धूम्रपान का उपयोग न करें।
  6. सोने से पहले अधिक मात्रा में भोजन करने और पेय पदार्थों से बचें।
  7. अपने बेडरूम को आरामदायक बनाएं और केवल सेक्स करने या सोने के लिए इसका इस्तेमाल करें।
  8. आरामपूर्वक तरीके से सोने के लिए कुछ आदतें अपना सकते हैं, जैसे – सोने से पहले स्नान करना, किताबें पढ़ना या धीमी आवाज़ में संगीत सुनना।

अनिद्रा (नींद न आना) का परीक्षण – Diagnosis of Insomnia in Hindi

अनिद्रा का निदान 

डॉक्टर एक पूर्ण चिकित्सकीय इतिहास के साथ अनिद्रा का मूल्यांकन शुरू करेंगे। संपूर्ण चिकित्सकीय मूल्यांकन के साथ एक पूर्ण चिकित्सा इतिहास और शारीरिक परीक्षण, अनिद्रा के मूल्यांकन और उपचार के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

आपकी स्थिति के आधार पर अनिद्रा के निदान और इसके कारणों की खोज में शामिल हो सकते हैं –

  1. शारीरिक परीक्षण – यदि अनिद्रा का कारण अज्ञात है, तो चिकित्सकीय समस्याओं के लक्षणों को देखने के लिए जो अनिद्रा से संबंधित हो सकते हैं, आपके डॉक्टर शारीरिक परीक्षण कर सकते हैं। कभी-कभी थायरॉयड समस्याओं या अन्य स्थितियों की जाँच करने के लिए रक्त परीक्षण किया जा सकता है, जो नींद की कमी से जुड़ा हो सकता है।
  2. नींद की आदतों की समीक्षा – आपकी नींद से संबंधित प्रश्न पूछने के अलावा डॉक्टर आपके सोने-जागने का पैटर्न और दिन में आने वाली नींद का स्तर निर्धारित करने के लिए आपको एक प्रश्नावली भरने के लिए दे सकते हैं। आपको कुछ हफ्तों तक स्लीप डायरी (इस डायरी में व्यक्ति दैनिक रूप से अपने सोने और जागने के समय और पैटर्न का रिकॉर्ड रखता है) रखने के लिए भी कहा जा सकता है।  
  3. नींद का अध्ययन – यदि आपकी अनिद्रा का कारण स्पष्ट नहीं है या आपके अंदर किसी अन्य नींद की बीमारी, जैसे कि स्लीप एपनिया या रेस्टलेस लेग सिंड्रोम के लक्षण दिख रहे हैं, तो आपको स्लीप सेंटर (जहाँ नींद की बीमारियों का इलाज किया जाता है) में एक रात बिताने की आवश्यकता हो सकती है। जब आप सोते हैं, तो आपकी मस्तिष्क तरंगों, श्वास, दिल की धड़कन, आँखों और शरीर की अन्य गतिविधियों की निगरानी और रिकॉर्ड के लिए टेस्ट किये जाते हैं।

आपके डॉक्टर पूर्ण चिकित्सा इतिहास के साथ अनिद्रा का मूल्यांकन शुरू कर देंगे। चिकित्सकीय मूल्यांकन के साथ, एक पूर्ण चिकित्सा इतिहास और शारीरिक परीक्षण, अनिद्रा के मूल्यांकन और उपचार के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

नींद न आने (अनिद्रा) का इलाज – Insomnia Treatment in Hindi

अनिद्रा का उपचार क्या है?

आपकी नींद की आदतों को बदलकर और अनिद्रा से संबंधित किसी भी समस्या का पता लगाकर (जैसे कि तनाव, चिकित्सकीय स्थितियाँ या दवाइयां) कई लोगों की आरामदायक नींद को लौटाया जा सकता है। यदि ये उपाय काम नहीं करते हैं, तो आपके डॉक्टर तनाव से मुक्ति दिलाने और नींद में सुधार करने के लिए संज्ञानात्मक व्यावहारिक थेरेपी (cognitive behavioral therapy), दवाओं या दोनों का सुझाव दे सकते हैं।

1. अनिद्रा के लिए संज्ञानात्मक व्यावहारिक थेरेपी (Cognitive Behavioral Therapy for Insomnia)

अनिद्रा के लिए की जाने वाली संज्ञानात्मक व्यावहारिक थेरेपी (CBT-I) नकारात्मक विचारों और क्रियाओं को नियंत्रित करने में आपकी मदद कर सकती है, जो आपको जगाते रहते हैं। आमतौर पर अनिद्रा से ग्रसित लोगों के लिए उपचार की पहली सीढ़ी के रूप में इस थेरेपी की सिफारिश की जाती है। सामान्य तौर पर, सीबीटी-आई (CBT-I) नींद की दवाओं के समान या अधिक प्रभावी है। सीबीटी-आई का संज्ञानात्मक हिस्सा आपको उन कारणों को पहचानना और बदलना सिखाता है, जो आपकी सोने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। यह नकारात्मक विचारों और चिंताओं को नियंत्रित करने में आपकी मदद कर सकता है, जो आपको जगाते हैं। यह उस चक्र को दूर करने में भी शामिल हो सकता है, जहाँ आपको सोते वक़्त इस बात की चिंता होती है कि आपको नींद नहीं आएगी।

सीबीटी-आई का व्यावहारिक हिस्सा आप में अच्छी नींद की आदतों को विकसित करने और ऐसे व्यवहारों को दूर करने में मदद करता है, जो आपकी नींद को बाधित करते हैं। इन रणनीतियों में निम्नलिखित उदाहरण शामिल हैं –

  1. उद्दीपन नियंत्रण चिकित्सा (Stimulus control therapy) – यह विधि उन कारकों को दूर करने में मदद करती है, जो आपके मस्तिष्क को नींद का विरोध करने के लिए तैयार करते हैं। उदाहरण के लिए आप सोने और जागने का एक नियत समय तय कर करें और दिन में सोने से बचें। केवल सोने और सेक्स करने के लिए बिस्तर का उपयोग करें। अगर आपको लेटने के 20 मिनट के भीतर नींद नहीं आती, तो बाहर चले जाएं और जब नींद आये, तभी अपने बैडरूम में वापस आएं।
  2. विश्राम तकनीकें (Relaxation techniques)  प्रोग्रेसिव मांसपेशीय विश्राम (Progressive muscle relaxation), बायोफीडबैक (biofeedback) और श्वसन सम्बन्धी व्यायाम, सोने के समय होने वाली चिंता को कम करने के तरीके हैं। इन तकनीकों का अभ्यास करने से आपको अपनी श्वास, हृदय गति, मांसपेशियों में तनाव और मूड को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है, ताकि आप आराम कर सकें।
  3. नींद पर रोक – यह उपचार आपके बिस्तर में बिताए जाने वाले समय को घटाता है और दिन की नींद से बचाता है, जिससे आंशिक नींद का अभाव होता है और आप अगली रात बहुत थका हुआ महसूस करते हैं। एक बार आपकी नींद में सुधार हो जाये, तो आपके सोने का समय धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है।
  4. निष्क्रिय अवस्था में जागृत रहना – इसे “विरोधाभासी उद्देश्य” (paradoxical intention) भी कहा जाता है। इस चिकित्सा का उद्देश्य अनिद्रा से ग्रस्त व्यक्तियों की चिंता को कम करना है, जो उन्हें बिस्तर में लेटकर नींद न आने के कारण होती है। इस उपचार में व्यक्ति को नींद की चिंता करने के बजाय जागने का प्रयत्न करने के लिए कहा जाता है।
  5. प्रकाश चिकित्सा – यदि आप बहुत जल्दी सो जाते हैं और फिर बहुत जल्दी जागते हैं, तो आप इस चक्र में संतुलन बनाने के लिए प्रकाश का उपयोग कर सकते हैं। साल में जब दिन बड़े होते हैं और शाम को बाहर रोशनी होती है, तो उस समय आप बाहर घूम  सकते हैं या आप एक प्रकाश बॉक्स का उपयोग कर सकते हैं। अपने चिकित्सक से इनके बारे में परामर्श करें।  

आपके डॉक्टर आपकी नींद और दिन में सतर्कता (alertness) को बढ़ावा देने वाली आदतों को विकसित करने में आपकी सहायता करने के लिए आपकी जीवन शैली और नींद के वातावरण से संबंधित अन्य रणनीतियों की सिफारिश कर सकते हैं। 

2. निर्धारित दवाएं (Prescription medications)

डॉक्टर द्वारा निर्धारित नींद की गोलियां आपको नींद आने में, सोये रहने में या दोनों में मदद कर सकती हैं। आमतौर पर डॉक्टर एक हफ्ते से ज़्यादा समय के लिए नींद  की गोलियों का सुझाव नहीं देते हैं, लेकिन कुछ दवाएं लम्बे समय तक ली जा सकती हैं। इनमें ज़ोपिकॉल्न (लुनेस्टा) (Eszopiclone – Lunesta), रमेल्टॉन (रोज़ेरेम) (Ramelteon – Rozerem) शामिल हैं। 

निर्धारित (Prescription) नींद की गोलियों के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जैसे कि दिन में अर्धचेतनावस्था और बेहोश होने का खतरा बढ़ना या ये हमारी आदत भी बन सकती हैं। अतः इन दवाओं और अन्य संभावित दुष्प्रभावों के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

3. मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध नींद के अन्य साधन 

गैर-निर्धारित (Nonprescription) नींद की दवाओं में एंटीहिस्टामाइन (antihistamines) होते हैं, जो आपको सुस्त कर सकते हैं, लेकिन इनका नियमित उपयोग ठीक नहीं है। इन दवाओं को लेने से पहले अपने चिकित्सक से बात करें। एंटीहिस्टामाइन के कई दुष्परिणाम हो सकते हैं, जैसे – दिन में नींद आना, चक्कर आना, भ्रम, चेतना में कमी आना और पेशाब करने में कठिनाई, जो अधेड़ व्यक्तियों में और भी गंभीर हो सकते हैं।

4. वैकल्पिक चिकित्सा (Alternative medicine)

बहुत से लोग अनिद्रा के उपचार के लिए अपने चिकित्सक के पास नहीं जाते हैं और अपने आप इस समस्या से निपटने की कोशिश करते हैं। हालाँकि, कई मामलों में सुरक्षा और प्रभाव साबित नहीं किया गया है। 
कुछ लोग निम्नलिखित उपचार करने की कोशिश करते हैं, जैसे –

  1. मेलाटोनिन (Melatonin) – मेडिकल स्टोर पर मिलने वाला यह सप्लीमेंट अनिद्रा को दूर करने का एक तरीका है। आमतौर पर कुछ हफ्तों तक मेलाटोनिन का उपयोग सुरक्षित माना जाता है, लेकिन यह साबित करने के लिए कोई ठोस प्रमाण मौजूद नहीं है कि मेलाटोनिन अनिद्रा के लिए एक प्रभावी उपचार है। इसके दीर्घकालिक उपयोग की सुरक्षा के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।   
  2. वेलेरियन (Valerian) – यह आहार सम्बन्धी पूरक (dietary supplement) नींद लाने में सहायक होता है, क्योंकि इसका एक हल्का प्रभाव होता है। हालाँकि, यह अच्छी तरह से अध्ययन नहीं किया गया है। इसका उपयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से चर्चा करें। कुछ लोग जो इसकी ज़्यादा खुराक का इस्तेमाल करते हैं या लंबे समय से उपयोग कर रहे हैं, उनके लिवर को नुकसान हो सकता है। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह नुकसान वेलेरियन के करण होता है।
  3. एक्यूपंक्चर (Acupuncture) – कुछ प्रमाण हैं कि एक्यूपंक्चर अनिद्रा से ग्रसित लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन अधिक शोध की आवश्यकता है। यदि आप अपने पारंपरिक उपचार के साथ एक्यूपंक्चर का चुनाव करते हैं, तो अपने चिकित्सक से पूछिए कि एक योग्य एक्यूपंक्चर चिकित्सक कैसे खोजें।
  4. योग – कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि योग या ताई ची (tai chi) का नियमित अभ्यास नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
  5. ध्यान (Meditation)  कई छोटे अध्ययन सुझाव देते हैं कि पारंपरिक उपचार के साथ ध्यान (मेडिटेशन) से नींद में सुधार और तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

5. हर्बल और डाइटरी स्लीप एड्स (dietary sleep aids) के बारे में सावधानी

क्योंकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration) ने निर्माताओं के लिए यह अनिवार्य नहीं किया है कि वे डाइटरी सप्लीमेंट स्लीप एड्स को बेचने से पहले उनके प्रभावशाली या सुरक्षित होने का प्रमाण दिखाएं, इसलिए किसी भी हर्बल सप्लीमेंट या अन्य ओटीसी (OTC – Over- The-Counter) उत्पादों को लेने से पहले अपने चिकित्सक से बात करें। कुछ उत्पाद हानिकारक हो सकते हैं और यदि आप कुछ दवाएं ले रहे हैं, तो इसका नुकसान हो सकता है।

अनिद्रा (नींद न आना) के जोखिम और जटिलताएं – Insomnia Risks & Complications in Hindi

अनिद्रा के जोखिम और जटिलताएं 

क्रोनिक अनिद्रा से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम जुड़े हुए हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ के अनुसार, अनिद्रा आपके मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य के प्रति जोखिम को बढ़ा सकती है।

1. चिकित्सकीय परिस्थितियों के लिए जोखिम में वृद्धि

इनमें शामिल हैं –

  1. स्ट्रोक
  2. अस्थमा के दौरे
  3. मिर्गी का दौरा 
  4. कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली
  5. दर्द के प्रति संवेदनशीलता
  6. सूजन
  7. मोटापा
  8. डायबिटीज मेलिटस
  9. उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर)
  10. हृदय रोग

2. मानसिक स्वास्थ्य विकारों के लिए जोखिम में वृद्धि

इनमें शामिल हैं –

  1. अवसाद  
  2. चिंता
  3. भ्रम और हताशा

3. दुर्घटनाओं के लिए जोखिम में वृद्धि

अनिद्रा  प्रभावित कर सकती है आपके –

  1. ऑफिस या स्कूल में किया जाने वाले कार्य 
  2. सेक्स ड्राइव
  3. स्मृति
  4. निर्णय लेने की क्षमता 

दिन में आने वाली नींद तत्काल चिंता का विषय है। ऊर्जा की कमी चिंता, अवसाद या चिड़चिड़ापन   पैदा कर सकती है। ये न सिर्फ आपके ऑफिस या स्कूल के कार्य को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि बहुत कम नींद लेना कार दुर्घटनाओं के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।

अनिद्रा (नींद न आना) में परहेज़ – What to avoid during Insomnia in Hindi?

निम्नलिखित सुझावों का उद्देश्य अस्थायी अनिद्रा से उबरने में मदद करना और रात में एक अच्छी नींद लेने की संभावना को बढ़ाना है –

  1. अपने बेडरूम को एक आकर्षक स्थान बनाएं। कमरे को व्यवस्थित रखें। सुनिश्चित करें कि आपके पास आपकी ज़रूरतों के मुताबिक सही बिस्तर और गद्दे हों। घटिया गद्दे मांसपेशियों की समस्याओं और नींद में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। 
  2. केवल सोने और सेक्स करने के लिए ही बिस्तर का उपयोग करें। टीवी देखने, खाने, काम करने या किसी भी अन्य गतिविधि के लिए बिस्तर का उपयोग करने से बचें। यदि आप रात को बिस्तर पर बैठकर पढ़ना चाहते हैं, तो केवल मनोरंजक पुस्तकें पढ़ें।
  3. चिकित्सक अक्सर अनिद्रा के लिए उपचार योजना के एक हिस्से के रूप में “रीकंडीशनिंग” का उपयोग करते हैं। इस पद्धति के साथ लोग नए तरीके से निद्रा के साथ बिस्तर को संबद्ध करते हैं। यदि आप अपने आप को सोने  में असमर्थ पाते हैं, तो बिस्तर छोड़कर दूसरे कमरे में चले जाएं, ताकि आप सिर्फ सोने के लिए बिस्तर का उपयोग करें न कि जागने के लिए।
  4. नियमित रूप से सोने और जागने का एक पैटर्न बना लें। इसके परिणामस्वरूप आपका शरीर आंतरिक रूप से भी उस पैटर्न के अनुसार अपने आपको ढाल लेगा और आपको निर्धारित समय पर सोने और जागने के संकेत देगा। यह शुरू करने का एक अच्छा तरीका है – हर रोज़ एक ही समय पर उठना, यहाँ तक ​​कि सप्ताहांत (weekends) में भी।                                                                              
  5. चाहे दिन में कितनी भी नींद आये, लेकिन झपकी न लें। दोपहर में ली जाने वाली झपकी से रात में नींद आना मुश्किल हो सकता है। सप्ताहांत (weekends) पर अतिरिक्त नींद लेना आपके नियमित निद्रा पैटर्न को बिगाड़ सकता है और मिडवीक (midweek) अनिद्रा की स्थिति को खराब कर सकता है।                            
  6. दोपहर और शाम को कैफीन के सेवन को सीमित करें। याद रखें कि चॉकलेट खाने और कोको और कोला पीने से भी शरीर में कैफीन की मात्रा बढ़ती है।              
  7. अपने शराब के सेवन का ध्यान रखें। सोने से कुछ घंटे पहले किसी भी मादक पेय पदार्थ को न पीएं। दिन में किसी भी समय शराब की अत्यधिक मात्रा नींद के पैटर्न को बाधित कर सकती है और असंतोषजनक नींद की ओर ले जा सकते है। सिगरेट धूम्रपान के कारण भी अनिद्रा रोग गंभीर हो सकता है।
  8. दिन में थोड़ा व्यायाम करने की आदत डालें, लेकिन सोने से पहले व्यायाम बिलकुल न करें।
  9. शाम को हल्का भोजन खाएं। शाम को अत्यधिक भोजन करने या बिस्तर पर जाने से ठीक पहले खाना खाने से आपकी नींद में बाधा आ सकती है।
  10. सोने जाने से पहले कुछ चीज़ों की आदत डालें। सोने से पहले अपने मन को परेशान करने वाले विचारों से मुक्त करने की कोशिश करें और आरामदायक तथा मनोरंजक गतिविधि में संलग्न हों  जैसे कि पढ़ना, संगीत सुनना या एक मनोरंजक फ़िल्म देखना।

अनिद्रा (नींद न आना) में क्या खाना चाहिए? – What to eat during Insomnia in Hindi?

अनिद्रा में  क्या खाएं?

  1. चेरी का जूस – खट्टे पेय पदार्थों में मेलाटोनिन नामक हार्मोन होता है, जो नींद पर नियंत्रण रखता है।
  2. दूध – दूध में ट्रीप्टोफन (tryptophan) नामक एक एमिनो एसिड होता है। रात को गरम दूध पीने से नींद जल्दी आ जाती है।                                 
  3. साबुत अनाज – जौ, कुट्टू में मैग्नीशियम पाया जाता है, जो मांसपेशियों को सुचारु रूप से काम करने और लोगों को शांति का एहसास दिलाने में मदद  करता है।
  4. कॉम्प्लेक्स कार्ब्स (Complex carbs) – फली और चावल, विशेष रूप से चमेली चावल (jasmine rice)  इसके उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स (glycemic index) के साथ, जिसका मतलब है कि यह धीरे-धीरे पचता है और शकरकंद नींद लाने के अद्भुत स्रोत हैं, क्योंकि इनमें पोटेशियम होता है जो मांसपेशियों को शिथिल करने में मदद करता है।                          
  5. हर्बल चाय – हर्बल चाय में एक तेज़ सुगंध होती है, लेकिन यह कुछ लोगों को जल्दी सोने में मदद करती  है। यह चाय कैफीन मुक्त होती है, जो लोगों को सोने से पहले शांत करने में मदद करती है।
  6. केले – केले नींद को बढ़ाते हैं, क्योंकि इसमें प्राकृतिक रूप से मांसपेशियों को शिथिल करने वाले मैग्नीशियम और पोटेशियम मौजूद होते हैं। 
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क्या आपको भी नींद नहीं आती, ये उपाय करें और चैन की नींद सोएं – Sleeping Disorder

नींद न आने के पीछे बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे चिंता, डिप्रेशन, हार्ट अटैक, ओस्टियोपोरोसिस और आर्थराइटिस। नींद पूरी न होने पर आपकी स्मरण शक्ति कमजोर होने, चिड़चिड़ापन, हृदय रोग, डायबिटीज और मोटापे का खतरा बढ़ जाता है। अनिद्रा की इस परेशानी से छुटकारा दिलाने में दादी के नुस्खों जितने असरदार हैं ये आयुर्वेदिक टिप्स। ये आयुर्वेदिक नुस्खे आपको फिर से आपकी नींद वापिस दिला देंगे।

तर्पक कफ
तर्पक कफ पानी के उप दोष को कहते हैं। पानी हमारे ब्रेन सेल्स का लालन पालन करता है और अच्छी नींद दिलाता है। इस दोष में असंतुलन होना और ब्रेन सेल्स को सही पोषण न मिलने पर अनिद्रा हो जाती है। ऐसे में खुद को स्वस्थ रखने के लिए रात 8 बजे से पहले कार्बोहाइड्रेट और वसा से भरपूर खाना खाएं। गुड़ मिला ज्यादा वसा वाला दूध पिएं। जिन खाद्य पदार्थों में ट्रिप्टोफान, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, मेलाटोनिन और विटामिन बी6 होता है वे नींद दिलाने में मदद करते हैं। इसलिए अपने खाने में दूध, अंडा, पनीर, पास्ता, दही, केले और टमाटरों को जरूर शामिल करें।प्राण वात

प्राण वात, हवा का उप दोष है। इसकी कमी से अनिद्रा, चिंता और डिप्रेशन जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। प्राण वात तंत्रिका तंत्र को सेंसिटिव बनाता है और एक सेंसिटिव तंत्रिका तंत्र प्राण वात में असंतुलन पैदा कर अनिद्रा की समस्या पैदा कर सकता है। ऐसे में चिंता दूर करने के लिए टांगें गर्म पानी से धोएं और पांवों की मक्खन से मालिश करें। अगर मक्खन नहीं है तो दूध और मलाई का पेस्ट बना पांव के तलवे और माथे पर जरूर मालिश करें। इस व्यायाम को करने से शरीर में हो रही टेंशन कम होती है। अपने शरीर के प्रेशर प्वाइंट्स पर मालिश कर शरीर को जरूर रिलैक्स करें।

साधक पित्त
साधक पित्त आग का उप दोष है और दिल में रहता है। ये दोष आदमी की भावनाओं, इच्छाओं और आध्यात्मिकता को नियंत्रित करता है। साधक पित्त में असंतुलन से लोगों पर काम का दवाब बनता है, जिससे अनिद्रा की समस्या हो जाती है। इसे कम करने के लिए लोगों को खाने के बाद लौकी और गन्ने का जूस पीना चाहिए। पांच भिगोए हुए बादाम और 100 मिली लीटर हल्का गर्म बादाम वाला दूध सोने से पहले पिएं। आपको अनिद्रा से जल्द छुटकारा मिलेगा।

आयुर्वेद के ये टिप्स भी आपके काम आएंगे –

  • रोज एक ही समय पर सोएं और जगें, इससे एक रेगुलर स्लीपिंग पैटर्न बनेगा।
  • रोज रात को सोने से पहले की एक रूटीन बनाएं जैसे खुद को बिस्तर पर रिलैक्स करें। बिस्तर पर किसी भी तरह की एक्टिव और दिमाग को व्यस्त रखने वाली गतिविधि न करें। टीवी, मोबाइल और कंप्यूटर की जगह, ध्यान लगाकर धीरे-धीरे सांसें लेकर खुद को शांत रखने की कोशिश करें।
  • रात को सोने से पहले कैफीन और शराब का सेवन न करें।
  • तिल के तेल से अपने पांव के तलवों की मालिश करें।
  • बिस्तर पर जाकर हल्का योग करें।