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Benefits of Coriander | हरा धनिया के फायदे

शक्ति से भरपूर हरा धनिया

बारिक छोटे टूकडो में कटे हुए धनिया के पत्तों को आपके गरम सूप के कटोरे या अपनी पसंदीदा पावभाजी के ऊपर
छिड़कने से लुभावना होता है, इसमें बहुत सारे औषधीय गुण भी हैं। इसके पत्ते, उपजी, बीज और जड़ें, प्रत्येक एक अलग स्वाद प्रदान करते हैं।

हरा धनिया के औषधीय गुण | Goodness of Coriander in Hindi

चित्र के सुंदर पत्ते एक शक्तिशाली प्राकृतिक सफाई तत्व जैसे हैं। शरीर से भारी धातुओं और जहरीले तत्वों को साफ करने के लिए इसका प्रभावी ढंग से उपयोग होता हैं। धनिये का प्रयोग एलर्जी, मूत्राशय की जलन (मूत्राशय गुजरते समय जलन होती है) और त्वचा से संबंधीत एलर्जी की सूजन का इलाज करने के लिए किया जाता है। इससे जीवन शक्ति में सुधार होता है और दर्द घट जाता है। लोहतत्व और विटामिन ए, बी और सी से भरपूर, इसका भोजन में इस्तेमाल होने पर यह पौष्टिक मूल्य बढ़ाता है। भोजन की पाचनशक्ति बढ़ जाती है और भूख कम हो सकती है।

हरा धनिया के फायदे | Benefits of Coriander

  1. अतिसार और एलर्जी : 1 चम्मच धनिया रात भर पानी में भिगोएँ। उबालें, छाने और पी लें।
  2. सिरदर्द : कोमल धनिये के पत्तों के रस को माथे पर लगाए ।
  3. माहवारी में अतिरिक्त खून बह रहा है : दूध के साथ धनिया के बीज का सघन काढ़ा लें।
  4. आंख आना : धनिया के पत्तों के रस के साथ आंखें नियमित रूप से धोएं। धनिया के बीज का काढ़ा लाल और सूखी आँखों को आराम देता है।
  5. मुँहासे और काले मस्से : कोमल धनिये के पत्तों के रस में एक चुटकी हल्दी डालकर चेहरे पर लगाएँ और सूखने के बाद धो लें।
  6. जंतु का काटना : 6-7 चम्मच धनिये के पत्ते का रस पी लें। और पेस्ट को काटी हुई जगह पर लगाएँ।
  7. मुंह के अल्सर: धनिया के बीज काढ़ा पीएं और इसके साथ कुल्ला करें।
  8. मुंह से दुर्गंध (बुरा सांस) : निश्चित समयांतर पर धनिये के बीज का चूर्ण ले।
  9. त्वचा के फफोले: बीज के काढ़े को पी लें। पानी में 1 चम्मच धनिये के बीज को उबालें और इसके पेस्ट को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं।
  10. मुंह का सूखापन, पेट में दर्द, बवासीर : धनिया के बीज का काढ़ा पीएं।
  11. नकसीर : धनिये के पत्ते का रस नाक में लगाएँ।
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Tamarind | इमली के औषधीय गुण

इमली – पोषक तत्वों से भरपूर

आम तौर से पाए जाने वाले इमली को अरबी और फारसी भाषा में दिए गए – हिंदी तामर और भारतीय खजूर सही मायने में उद्बोधक नाम है। भूरे रंग की नाज़ुक फली के अंदर जो मांसल खट्टा फल होता है उसमे टारटारिक एसिड और पेक्टिन समाविष्ट है।

इमली के फायदे | Benefits of Imli

आमतौर पर महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में क्षेत्रीय व्यंजनों में एक स्वादिष्ट मसाले के रूप में इमली का प्रयोग किया जाता है। खास तौर पर रसम, सांभर, वता कुज़ंबू (Vatha Kuzhambu), पुलियोगरे इत्यादि बनाते वक्त इमली इस्तेमाल होती है और कोई भी भारतीय चाट इमली की चटनी के बिना अधूरी ही है। यहां तक कि इमली के फूलों को भी स्वादिष्ट पकवान बनाने के उपयोग में लिया जाता है।

इसके पत्ते शरीर को शीतलता प्रदान करते हैं एवं अपित्तकर हैं और पेट के कीड़ों को नष्ट करने में भी मदद करते हैं। इसके अलावा, इसके पत्तों को पीलिया के इलाज में भी उपयोग में लाया जाता है। इमली के पेड़ की छाल एक स्तम्मक के रूप में काम आती है। इमली के फल का गूदा पाचन प्रणाली को शीतलता प्रदान करता है एवं रेचक और रोगाणु रोधक (anti-septic) भी होता है।

1. पाचन विकार
पके हुए फल का गूदा पित्त्त की उलटी, कब्ज और गैस की समस्या, अपचन के इलाज मे लाभदायक है। यह कब्ज़ मे भी लाभकारी है। पानी के साथ इसके गूदे को कोमल करके बनाया हुआ निषेध भूख मे कमी, भोजन ग्रहण की इच्छा मे कमी होने पर लाभकारी है। इमली के दूध का पेय भी पेचिश के इलाज मे काफी लाभकारी है।

2. स्कर्वी | विटामिन-सी की कमी
इमली में विटामिन सी की मात्रा प्रचुर होती है और यह स्र्कवी को रोकने और उसके इलाज में लाभदायक है।

3. सामान्य सर्दी-जुकाम को दूर करने के लिए
इमली और काली मिर्च का रसम, दक्षिण भारत मे सर्दी-जुकाम के इलाज के लिये इसे प्रभावशाली घरेलू नुस्खा माना जाता है।

4. जलने पर
इमली की कोमल पत्त्तिया जलने का घाव के इलाज मे काफी लाभकारी है। उसे एक ढके हुए बर्तन पर आग से गरम करते है| फिर उसे अच्छे से पीस कर उसे छान लेते है जिससे रेतिले पदार्थ निकल जाये (अलग हो जाए)। छानने के बाद उसे तिल के तेल के साथ मिलाकर जले हुए भाग पर लगाया जाता है। इससे घाव कुछ दिनों में ही ठीक हो जाता है।

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Ginger | अदरक

अदरक स्वाद में तीखी होती है। अदरक पाचक, चिड़चिड़ापन दूर करने वाली एक अध्भुत औषधि है। यह पीड़ानाशक और स्वादिष्ट होती है तथा वायू और कफ का नाश करती है। अदरक जमीन के नीचे पाई जानेवाली, ढाई से तीन फीट उचाई की झाडी की,पीले रंग की जड़ होती है। अदरक लंबे समय तक उपयोगी बनी रहे उस के लिये उसे धूप में सुखाया जाता है। कुछ जगह दूध में डूबोकर सूखने के बाद उसका सौन्ठ बनाया जाता है। सौन्ठ अदरक से भी ज्यादा गरम होती है। सौन्ठ से तेल निकाला जाता है। अगर आप अदरक को लम्बे समय तक संभल कर रखना चाहते हैं, तो उसे गीली मिट्टी में भी दबा कर रखा जा सकता है। मसाले और दवा के तौर पर अदरक को दुनियाभर में उपयोग किया जाता है। अदरक दवा के रूप में बहुत ही परिणामकारक सिद्ध हुआ है, इसलिये उसे ‘महाऔषधी’ कहा जाता है।

१० ग्राम ताजे अदरक के रस में पदार्थ

पानी ( Water) – ८०.९%वसा (Fats) – ०.९%
कार्बोहायड्रेड्स (Carbohydrates) – १२.३%कॅल्शियम (Calcium) – २ मि.ग्रॅ.
रेशा (Fibre) – २.४%फोस्फरस (Phosphorus) – ०.६० मि.ग्रॅ.
प्रोटीन्स (Proteins) – २.३%लोह (Iron) – ०.२६ मि.ग्रॅ.
खनिज (Minerals) – १.२%विटामिन सी (Vitamin C) – ०.६ मि.ग्रॅ.

अदरक के फायदे
पाचन विकार के लिए: पाचन विकारों में अदरक मदद कर सकता है.
1. अपच (Indigestion), खानेकी अनिच्छा, पेट में गैस होना, उल्टी होना, कब्ज होना आदि के लिये।
2. एसिडिटी के लिए बहुत फायदेमंद।
3. जी मचलना, छाती में जलन, खट्टी डकार आदि के लिये।
4. खाना खाने के पूर्व अदरक का टुकड़ा नमक के साथ चबा चबाकर खाये।
5. आधा चम्मच अदरक का रस, सम मात्रा में शहद और नीम्बू का रस मिलाकर दिन में तीन बार ले।
6. अदरक, सैन्धा नमक, काली मिर्च और पुदीने की चटनी भोजन के साथ ले।
7. सुबह शाम खाली पेट अदरक का छोटा सा टुकड़ा और उतना ही नमक चबा चबा कर उसे निगल ले। आधे घंटे तक कुछ ना खाये पिये। रात को सोने से पूर्व ठंडा दुध शक्कर मिलाकर पिये। यह उपाय इक्कीस दिनो तक करे। पुरानी पित्त की तकलीफ भी दूर हो जाती है।

सांस विकार के लिए
1. सर्दी, जुकाम, पुरानी काली खांसी, क्षयरोग, कफ, दमा आदि के लिये।
2. अदरक का रस शहद के साथ दिन में तीन बार लें।
3. अदरक के टुकडे पानी में उबालकर, जरूरत के अनुपात में शक्कर मिला कर वह पानी गरम करके पीना चाहिये। अदरक की चाय लीजिये।
4. अदरक का रस दुगने अनुपात में मिश्री या गुड के साथ मिलाकर चटवाये।
5. सौन्ठ तथा उससे चार गुना मिश्री का काढा लेने से कफ पतला होने में मदद होती है।

स्त्री रोग के लिए
स्त्रीरोग संबंधी समस्याओं को हल करने के लिए अदरक के प्रयोग।
1. अनियमित मासिक स्त्राव, पेट दर्द के लिये अदरक ड़ालकर उबाला हुआ पानी दिन में तीन बार लीजिये।
2. प्रसव के बाद होनेवाली इंद्रिय शिथिलता के लिये सौन्ठ पाक दिया जाता है।

वेदना शामक
वेदना कम करने के लिए अदरक के प्रयोग
1. अदरक को पानी के साथ पीसकर वह लेप माथे पर या जहां दर्द हो रहा हो वहा लगाये। ताज़ा जखमों पर ना लगाये।
2. दांत के दर्द में, अदरक का टुकड़ा दांत में पकड कर रखें।
3. कान के दर्द में, दो बूंद अदरक का रस कान में ड़ाले।
4. गठीया में कद्दूकस किया हुआ अदरक गरम करके लगाये।

आयुर्वेद के अनुसार शरीर में अनेक मार्ग है जिन्हे ‘स्त्रोतज’ कहां जाता है।अदरक की मदद से उन मार्गो का अवरोध दूर किया जा सकता है।
सावधानी:
अदरक उष्ण गुणधर्मी है, इसलिये गर्मी में कम उपयोग किया जाये।
उच्च रक्त चाप, अल्सर, रक्तपित्त आदि में अदरक का उपयोग ना करे।

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दालचीनी के फायदे | Health Benefits of Cinnamon

दालचीनी के फायदे | Health Benefits of Cinnamon in Hindi

दालचीनी का पेड हमेशा हराभरा तथा छोटी झाड़ी जैसा होता है। उसके तने की छाल चुनकर सुखाई जाती है। उनका आकार कवेलू जैसा गोलाकार, जाडा, मुलायम तथा भुरे लाल रंग का होता है। दालचीनी के पेड़ से हमेशा सुगंध आती है। इसका उपयोग मसालो और दवा के तौर पर किया जाता है। इसका तेल भी निकाला जा सकता है। दालचीनी के पेड़ को पत्तों का उपयोग खाने में मसाले की तरह किया जाता है। इन्हे तेजपत्ता भी कहा जाता है।

पाचन में सुधार लाने और जठर संबधी विकारों के लिए इन 4 अलग-अलग तरीकों से दालचीनी का उपयोग कर सकते है।

अपच, पेटदर्द और सीने में जलन महसूस होने पर आप दालचीनी, सौन्ठ, जीरा और इलायची सम मात्रा में लेकर पीसकर गरम पानी के साथ ले सकते हैं।

दालचीनी, काली मिर्च पावडर और शहद आदि मिलाकर भोजन के बाद लेने से पेट अफारा नहीं होता।

दालचीनी से जी मचलना, उल्टी और जुलाब रुकते है।

कब्ज और गैस की समस्या कम करने के लिये दालचीनी के पत्तों का चूर्ण और काढा बना कर लिया जाता है।

  • वीर्य वृद्धि के लिये दालचीनी पाउडर सुबह शाम गुनगुने दूध के साथ ले।
  • ठंड की वजह से सिरदर्द हो तो दालचीनी पानी के साथ पीसकर सिरपर लगाये।
  • मुह की दुर्गंध और दांत की दवा में दालचीनी का उपयोग किया जाता है।
  • मुहांसे कम करने के लिये दालचीनी का चूर्ण नींबू के रस में मिलाकर लगाये।
  • खसरा निवारक के तौर पर दालचीनी का उपयोग किया जाता है।

दालचीनी के पदार्थ | Ingredients in Cinnamon

प्रोटीन | Protienथायामीन |Thayamin
कार्बोहायड्रेट |Carbohydrateरिबोफ्लेविन |Reboflewin/td>
फॉस्फरस |Phosphorusनिआसीन | Niasin
सोडियम |Sodiumजीवनसत्व ‘अ’ & ‘क’ | Vitamin A & C
पोटॅशियम | Potassiumनमी & एश

दालचीनी स्वाद में तिखी मिठी होती है। दालचीनी ऊष्ण, दीपन, पाचक, मुत्रल, कफनाशक, स्तंभक गुणधर्मो वाली है। मन की बेचैनी कम करती है। यकृत के कार्य में सुधार लाता है। स्मरण शक्ती बढाती है।

सावधानी | Precautions to take while using Dalchini

  • दालचीनी उष्ण गुणधर्म की है, इसलिये गर्मी के दिनोमें कम उपयोग करें।
  • दालचीनीसे पित्त बढ सकता है।
  • ऊष्ण प्रकृती के लोग चिकित्सक से सलाह ले।